बस्तर। बस्तर पुलिस का 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चला साइबर जागृति अभियान संपन्न हो गया। पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में हुए इस अभियान का मकसद लोगों को ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों से बचाव के तरीके बताना रहा। स्कूल, कॉलेज, संस्थानों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और ग्राम चौपालों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके जरिए करीब 2 लाख 29 हजार लोगों तक साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी पहुंचाई गई। इस दौरान नागरिकों को OTP, PIN, CVV और UPI PIN जैसी गोपनीय जानकारी साझा न करने, अनजान लिंक से दूरी बनाए रखने, संदिग्ध APK या ऐप डाउनलोड नहीं करने और डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी से सावधान रहने की समझाइश दी गई।
अभियान के दौरान बस्तर पुलिस के साइबर विभाग ने Project ReConnect भी शुरू किया। तकनीकी माध्यमों और पुलिस की कार्रवाई के जरिए गुम हुए मोबाइल फोन की पहचान कर उन्हें उनके वास्तविक मालिकों तक पहुंचाया गया। परियोजना के तहत करीब 25 लाख रुपये कीमत के 151 मोबाइल बरामद किए गए और पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा व सिटी एसपी सुमित कुमार धोत्रे ने इन्हें संबंधित लोगों को सौंपा। लंबे समय बाद अपने मोबाइल वापस मिलने पर लोगों ने खुशी जताई। पुलिस के मुताबिक, इस पहल से गुम संपत्ति की बरामदगी के साथ पुलिस और नागरिकों के बीच भरोसा बढ़ाने में भी मदद मिली।
अभियान के समापन कार्यक्रम में मोबाइल प्राप्त करने वाले लोगों और उपस्थित नागरिकों को साइबर सुरक्षा का संकल्प दिलाया गया। सभी ने गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करने, संदिग्ध लिंक से बचने और अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी साइबर ठगी के प्रति जागरूक करने की बात कही। पुलिस ने कहा कि अभियान समाप्त होने के बावजूद साइबर जागरूकता लगातार जरूरी है, क्योंकि ठगी के नए तरीके सामने आते रहते हैं। पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए संदेश दिया कि साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता ही सुरक्षित बस्तर की मजबूत नींव है।
