नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर जस्टिस उज्जल भुइयां और पूर्व जस्टिस नरीमन के उठाए सवालों और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के कथित विरोध पर प्रतिक्रिया दी है। पत्रकारों से बातचीत में अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “जस्टिस नरीमन सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज हैं। इससे पहले वे वरिष्ठ वकील थे। उनका नाम बड़े आदर से लिया जाता है। उन्हें निष्पक्षता के सिवा किसी तरह का पक्ष लेते नहीं देखा गया है। वे आम आदमी पर बोल रहे थे।
आम आदमी के लिए इससे बड़ी बात क्या है कि उसका वोट ही हटा दिया जाए। आम आदमी का सबसे बड़ा मानवाधिकार अगर कोई है, तो गणतंत्र में मतदान का अधिकार है। इसलिए उन्होंने सच कहा है। मैं उनकी इस बात का स्वागत करता हूं।” अभिषेक मनु सिंघवी ने आगे कहा, “जस्टिस उज्जल भुइयां विद्यार्थियों के स्थल पर बोल रहे थे। उन्होंने जो कहा है, उसमें कोई त्रुटि नहीं निकाल सकता। मेरा मानना है कि अगर इन वक्तव्यों को देखा जाए तो संवैधानिक संरक्षक का इससे ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य क्या होगा? संविधान के संरक्षक यही न्यायाधीश हैं। उन्होंने बिल्कुल सत्य कहा है। मेरी आशा और विश्वास है कि इसी प्रकार के स्वतंत्र व्यक्तित्व से सुधार आएगा।
ज्ञानेश कुमार को लेकर अपने बयान पर सफाई देते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “पूरा इंटरव्यू छपा है। मैंने कहा था कि कई लोग बिना वजह कानून का दरवाजा खटखटाते हैं, जबकि उन्हें कानून की सीमाएं पता होती हैं और कई बार गलत तरीके से या जानबूझकर उस चीज को वैधता दे देते हैं। हर चीज का हल अदालत के दरवाजे पर नहीं होता। मेरा सिर्फ इतना कहना है कि सोच-समझकर कानून के पास जाना चाहिए।
