गांधी के तीन मंत्र ही युवाओं को बनाएंगे आत्मनिर्भर और निडर : प्रो. दयाल

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रायपुर। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में आज “भारतीय युवाओं पर महात्मा गांधी के प्रेरणादायक प्रभाव” विषय पर गोलमेज सम्मेलन आयोजित हुआ।

अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने गांधी दर्शन के तीन प्रासंगिक विचार युवाओं के लिए प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा, पहला – शिक्षा का उद्देश्य मन और इंद्रियों को वश में करना है। आज की डिग्री-केन्द्रित शिक्षा नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षा जो युवाओं में निडरता और स्वावलंबन पैदा करे, वही सच्ची शिक्षा है।

दूसरा – गरीब से गरीब भी कहे, यह देश मेरा है। गांधी जी ऐसे भारत का सपना देखते थे, जहां अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी लगे कि राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका है। युवा जब तक वंचित की आवाज नहीं बनेंगे, विकसित भारत अधूरा रहेगा। तीसरा – भ्रष्टाचार पर प्रहार। गांधी जी का मंत्र था – “धरती पर हमारी जरूरतों के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लालच के लिए नहीं।” आज युवाओं में लालच नहीं, आवश्यकता-आधारित जीवनशैली ही भ्रष्टाचार को रोक सकती है।

सम्मेलन में करीब 15 विद्यार्थियों ने गांधीजी के विचारों को स्टार्ट-अप और डिजिटल युग से जोड़ने पर चर्चा की। छात्रों ने गांधी जी की दक्षिण अफ्रीका यात्रा से लेकर भारत के आजाद होने तक में उनके योगदान को लेकर गंभीरता से चर्चा की। छात्रों के डिस्कशन में यह है प्रमुख रूप से निकलकर आया कि बैरिस्टर से बापू बनने तक कि उनकी यात्रा युवाओं के लिए काफी प्रेरणादायक रही।

कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभागाध्यक्ष डॉ नृपेंद्र शर्मा, पत्रकारिता विभागाध्यक्ष पंकज नयन पांडेय, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग अध्यक्ष डॉ शैलेंद्र खंडेलवाल, जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ राजेंद्र मोहंती, सामुदायिक रेडियो ‘संवाद’ की प्रभारी डॉ वैशाली गोलाप, अतिथि व्याख्याता डॉ.अनिल शुक्ला डॉ.अनामिका शर्मा डॉ.हितेश तिवारी, डॉ ज्योति शर्मा समेत बड़ी संख्या में छात्र – छात्राएं उपस्थित रहे।