दिल्ली। सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने शीतकालीन कार्ययोजना 2026-27 के तहत तैयारियां तेज कर दी हैं। सरकार का फोकस प्रदूषण बढ़ने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से रोकथाम, सख्त प्रवर्तन, तकनीक आधारित निगरानी और जनभागीदारी पर है।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के अनुसार, दिल्ली में प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों पर कार्रवाई के साथ-साथ पूरे NCR में समन्वित प्रयास जरूरी हैं। सरकार के मुताबिक, दिल्ली में करीब 30 प्रतिशत प्रदूषण स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होता है, जबकि आसपास के क्षेत्रों की गतिविधियों का भी प्रदूषण पर बड़ा प्रभाव पड़ता है।
‘नो PUCC-नो फ्यूल’ व्यवस्था होगी सख्त
दिल्ली के करीब 500 पेट्रोल पंपों पर ‘No PUCC, No Fuel’ व्यवस्था को मिशन मोड में लागू करने की तैयारी है। वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के बिना वाहनों को ईंधन नहीं देने की व्यवस्था पर सख्त निगरानी होगी। इसके अलावा End-of-Life (EOL) वाहनों की पहचान और कार्रवाई के लिए ANPR कैमरों के इस्तेमाल को बढ़ाया जाएगा।
2.44 लाख वाणिज्यिक वाहनों की जांच की क्षमता
दिल्ली में फिलहाल तीन Automated Testing Stations (ATS) संचालित हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता सालाना करीब 2.44 लाख वाणिज्यिक वाहनों की जांच करने की है। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बस फ्लीट बढ़कर 6,840 हो गई है, जिसमें 5,088 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं।
सरकार का लक्ष्य औसत दैनिक मेट्रो यात्रियों की संख्या 65 लाख से बढ़ाकर 72 लाख और DTC बसों की दैनिक सवारियों को 37 लाख से बढ़ाकर 42 लाख करना है। इसके लिए Delhi Metro Sarthi App, साझा परिवहन और कार-पूलिंग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
कार्यालयों में 50% स्टाफ, बाकी WFH
सर्दियों में ट्रैफिक और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत तक स्टाफ को कार्यालय से काम करने और बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने की योजना है। MCD कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक और GNCTD कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित किए जाएंगे।
हॉटस्पॉट और सड़क की धूल पर भी फोकस
प्रदूषण और ट्रैफिक हॉटस्पॉट के तीन किलोमीटर के दायरे को कवर करते हुए विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी। चिन्हित 62 ट्रैफिक जाम वाले स्थानों में से 42 का समाधान किया जा चुका है। वहीं, 15 सिग्नल-फ्री स्ट्रेच में से आठ पूरे हो चुके हैं और बाकी सात को अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए 2026 में 3,065 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास का लक्ष्य रखा गया है। 20 सितंबर तक 1,193 किलोमीटर सड़क का काम पूरा हो चुका था, जबकि 1,872 किलोमीटर पर काम जारी था।
