कांकेर। जिले के आमाबेड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम जंगलपारा गरदा में मोटरसाइकिल को लेकर हुए विवाद के दौरान बड़े भाई की हत्या के मामले में कांकेर जिला न्यायालय ने आरोपी छोटे भाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी ने विवाद के दौरान बड़े भाई से भरमार बंदूक छीनकर उसके बट से सिर पर दो बार वार किया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास के साथ 1 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर उसे 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला 20 अक्टूबर 2025 की रात करीब 8 बजे का है। ग्राम जंगलपारा गरदा निवासी मंगऊ कावड़े (31 वर्ष) नारायणपुर से लौटकर अपने घर के आंगन में बैठा था। इसी दौरान उसका बड़ा भाई मंगतूराम कावड़े (35 वर्ष) भरमार बंदूक लेकर वहां पहुंचा और मोटरसाइकिल नहीं देने की बात को लेकर उससे विवाद करने लगा। विवाद के दौरान मंगतूराम ने भरमार बंदूक से फायर कर दिया। गोली से निकला लोहे का टुकड़ा मंगऊ के दाहिने पैर में लगा, जिससे वह घायल हो गया।
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घटना के बाद गुस्से में मंगऊ ने अपने भाई से भरमार बंदूक छीन ली और उसे जमीन पर पटककर क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद उसी बंदूक के बट से मंगतूराम के सिर पर दो बार वार कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद मंगतूराम आंगन में गिर पड़ा और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई।
आरोपी ने घटना की जानकारी तत्काल परिवार के किसी सदस्य को नहीं दी। अगले दिन मृतक की मां रजाय बाई ने मंगतूराम को घर के आंगन में मृत अवस्था में देखा। पूछताछ के दौरान आरोपी ने गुस्से में बंदूक के बट से हमला करने की बात स्वीकार की। इसके बाद घटना की सूचना पुलिस को दी गई और आमाबेड़ा थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी मंगऊ कावड़े को 30 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने प्रधान सत्र न्यायाधीश संजीव टामक की अदालत में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता ईश्वरलाल साहू ने 16 महत्वपूर्ण गवाहों का परीक्षण-प्रतिपरीक्षण कराया तथा घटना से संबंधित दस्तावेज और जब्ती सामग्री न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी मंगऊ कावड़े को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 1 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर आरोपी को 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
