नईदिल्ली। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर एक रिपोर्ट में किए गए सनसनीखेज दावों के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा कि एक पूरे व्यक्ति ने चुनाव आयोग को हाइजैक कर लिया है, क्या बाकी के 2 चुनाव आयुक्त केवल देखने के हैं। आप के नेता अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले ही चुनाव आयोग को चला रहे हैं।
केजरीवाल ने कहा, कोई अकेला व्यक्ति चुनाव आयोग नहीं चला सकता है। तीनों आयुक्त बराबर है। मुख्य चुनाव आयुक्त के पास ज्यादा अधिकार नहीं है। रिपोर्ट कहती है कि ज्ञानेश कुमार खुद चुनाव आयोग चला रहे हैं। संधु साहब ने ज्ञानेश कुमार को चिट्ठी लिखी कि आयोग की मंजूरी के बिना आदेश जारी किए जा रहे हैं। एक चिट्ठी में उन्होंने कहा कि मीडिया से मुझे फैसलों के बारे में पता चल रहा है।
राहुल गांधी ने कहा, वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे अंजाम देने वाले भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है। इंसाफ जरूर होगा।
केजरीवाल ने कहा, एसआईआर के तहत 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए। ये पूरी प्रक्रिया गैरकानूनी है, क्योंकि चुनाव आयोग ने बहुमत से उसे मंजूरी नहीं दी। इस प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए। नाम जोडऩे और काटने का अधिकार ईआरओ से छीन लिया गया है। दिल्ली में बैठ लोग तय कर रहे हैं कि किसका नाम रहेगा, किसका काटा जाएगा। मतदाता सूची दिल्ली के चुनाव आयोग कार्यालय से बन रही है।
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, सीईसी ने देश को भ्रमित किया। आज चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्था भी स्वतंत्र नहीं है। चुनाव आयोग में बहुमत से फैसले होते हैं, लेकिन सीईसी ने अपने साथियों को भ्रमित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि चुनाव आयोग बहुमत की संस्था है। ऐसे में सवाल है कि क्या एक व्यक्ति विशेष ही चुनाव आयोग को चला रहा है। सीईसी ने फॉर्म 6 को बदलकर नियमों का उल्लंघन किया है। कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा, ज्ञानेश कुमार भारत के लोगों के सबसे बड़े दुश्मन हैं। आज युवा पीढ़ी बेरोजगारी और पेपर लीक का सामना कर रही है; बच्चे स्कूलों के खस्ताहाल ढांचे और मिलावटी सिरप से जूझ रहे हैं।
ऐसे संकट में लोगों को यही उम्मीद होती है कि कोई बेहतर सरकार आएगी और समस्याओं का समाधान करेगी। लेकिन अगर जिंदगी को बेहतर बनाने का यही जरिया—मतदान का अधिकार और निष्पक्ष चुनाव—उनसे छीन लिया जाए, तो लोग कहां जाएंगे?
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को लेकर खुलासे के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बुधवार को एक वी़डियो जारी कर कहा कि यह एक बहुत ही चौंकाने वाली और शर्मनाक बात है, चुनाव आयुक्त को गिरफ़्तार किया जाना चाहिए। उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। साथ ही, उन्होंने कहा कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर एकजुट है।
ममता ने कहा, यह एक बहुत ही चौंकाने वाली और शर्मनाक बात है। हमने अपनी जिंदगी में ऐसा कभी नहीं देखा। इस चुनाव आयुक्त को गिरफ़्तार किया जाना चाहिए। उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और भाजपा को यह समझना चाहिए कि वे हमारे संविधान और लोकतंत्र को खत्म नहीं कर सकते।
ममता ने कहा, हमने जो पहले कहा था, वह अब सच साबित हो गया है…ज्ञानेश कुमार ने पुलिस का गलत इस्तेमाल किया है। ममता ने आगे कहा, भाजपा और ज्ञानेश कुमार एक संयुक्त उद्यम कंपनी हैं। उन्होंने मिलकर बंगाल चुनाव लूटा है। अगर आपमें थोड़ी भी नैतिक शक्ति है, तो हमारा चुनाव वापस कीजिए।
उन्होंने कहा कि पूरे भारत में बस इसी बात पर चर्चा हो रही है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गिरफ़्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगाल में चुनाव से 7-8 महीने पहले पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चिंता जाहिर की थी। बंगाल में कुछ महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 15 वर्षीय शासन को समाप्त करके भाजपा ने पहली बार सत्ता हासिल की है।
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यहां 4 मई को घोषित 293 सीटों के परिणामों में से भाजपा ने 207 सीट जीतकर 147 सीटों के बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया, जबकि टीएमसी को 80 सीटें मिलीं। टीएमसी और ममता बनर्जी तभी से भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलीभगत और एसआईआर के जरिए धांधली का आरोप लगा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त डॉक्टर सुखबीर सिंह संधू और डॉक्टर विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार अपनी आपत्तियां चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष दर्ज कराई थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने जिन मुद्दों पर आपत्ति जताई उनमें नए मतदाताओं का पंजीयन, मतदाता सूची से नाम हटाना और जोडऩा और एसआईआर प्रक्रिया में मतदाता का नाम वापस जोडऩे के आदेशों के खिलाफ अपील करना जैसै मुद्दे शामिल थे।
