अमेरिका-ईरान के बीच न्यूयॉर्क में तीन घंटे चली बातचीत, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को ईरान ने रखीं शर्तें

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न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क तेज हुआ है। न्यूयॉर्क में कतर की मध्यस्थता के जरिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच बातचीत हुई। अमेरिकी विशेष दूत जारेड कुशनर भी इस प्रक्रिया में शामिल रहे। रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत करीब तीन घंटे तक चली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बैठक को अच्छा और सकारात्मक बताया है।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, यह संपर्क अमेरिकी पक्ष के अनुरोध पर हुआ और बातचीत में ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की शर्तें रखी गईं। ईरान ने कथित तौर पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, जमा की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करने और विभिन्न मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की मांग की है।

रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि यदि अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटाता है, तो ईरान सात दिन के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल सकता है। यह प्रस्ताव मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया गया था।
हालांकि, अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच बातचीत को लेकर दोनों पक्षों के विवरण में अंतर है। विटकॉफ के अनुसार, अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के बीच मध्यस्थ लगातार संदेश लेकर आते-जाते रहे और बातचीत सीधे आमने-सामने नहीं हुई। वहीं ईरानी सरकारी मीडिया ने अराघची और विटकॉफ की मुलाकात की पुष्टि की है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि विटकॉफ और कुशनर ने मध्यस्थों के साथ ईरान समझौते को लेकर बातचीत की। ट्रंप के मुताबिक, बैठक करीब तीन घंटे चली और उन्हें इसके परिणाम सकारात्मक लगे। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्षों के बीच जल्द ही एक और बैठक हो सकती है और समझौते की दिशा में आगे बढऩे की संभावना है।

कतर के साथ-साथ अन्य क्षेत्रीय देश भी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा बातचीत का रास्ता तैयार करने में भूमिका निभा रहे हैं। कतर ने कहा है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच संवाद का मार्ग बनाने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के प्रयासों में जुटा है।
बातचीत से कुछ घंटे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने ईरान को कड़ा संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि उनके सामने ईरान के साथ ऐसा समझौता करने का विकल्प है, जिससे वह दोबारा आगे बढ़ सके, या फिर सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाया जा सकता है। ट्रंप ने ईरान के साथ समझौता नहीं होने की स्थिति में इस्लामिक गणराज्य को तबाह करने की चेतावनी भी दी थी।

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इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए हुई बातचीत को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच महत्वपूर्ण राजनयिक संपर्क के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की ईरानी शर्तों और अमेरिकी रुख पर अंतिम सहमति नहीं बनी है। दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत आगे बढऩे की बात कही गई है।