नई दिल्ली। दिल्ली के तिगड़ी इलाके से रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिये 11 बाल श्रमिक मुक्त कराए गए। ये सभी दक्षिण दिल्ली जिले के तिगड़ी में मोटर साइकिल रिपेयरिंग शॉप, बेकरी, होटल, ढाबों और जूते-चप्पल की दुकान पर काम कर रहे थे। इन सबकी उम्र छह से लेकर 17 साल के बीच है। इन बच्चों को बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से ट्रैफिकिंग कर बाल श्रम के लिए दिल्ली लाया गया था।
रेस्क्यू ऑपरेशन एसोसिएशन फॉर वालंटियरी एक्शन से मिली सूचना के आधार पर किया गया। ऑपरेशन के लिए गठित की गई टीम में तहसीलदार देवली, श्रम विभाग, दिल्ली पुलिस, एसोसिएशन फॉर वालंटियरी एक्शन और बाल विकास धारा के सदस्य भी शामिल थे। एसोसिएशन फॉर वालंटियरी एक्शन और बाल विकास धारा, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के सहयोगी संगठन हैं। जेआरसी बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम करने वाला नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है, जो देश के 782 जिलों में जमीन पर काम कर रहा है।
मुक्त कराए गए बाल श्रमिकों में सबसे छोटे की उम्र केवल छह साल है। दूसरा सबसे छोटा बाल श्रमिक 10 साल का है। ये दोनों जूते-चप्पल की दुकान में काम करते थे। उस दुकान का मालिक दोनों बच्चों को मजदूरी के नाम पर केवल चिप्स और बिस्कुट देता था। इनमें से पांच बच्चों को मजदूरी के नाम पर एक भी पैसा नहीं मिलता था। जिनको मजदूरी मिल भी रही थी, वो नाममात्र की थी। दुकान मालिकों का तर्क था कि वो इन बच्चों को काम सीखा रहे थे।
दो बच्चे बेहद खराब और जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करते मिले। 16 साल का एक बच्चा ढाबे पर तंदूरी रोटी बनाने का काम कर रहा था, जो उसकी उम्र के लिहाज से जोखिम भरा था। वहीं, 17 साल का एक बच्चा मोटर साइकिल रिपेयरिंग की दुकान पर काम कर रहा था। रेस्क्यू के समय दोनों बच्चे बेहद मैले-कुचैले कपड़ों में मिले।
एसोसिएशन फॉर वालंटियरी एक्शन के कार्यकारी निदेशक धनंजय टिंगल ने दिल्ली सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘यह कार्रवाई राजधानी में बाल श्रम के खिलाफ प्रशासन की सक्रियता और नागरिक समाज संगठन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह स्पष्ट संदेश है कि बच्चों के शोषण को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई बच्चों का शोषण करने की हिम्मत ना कर सके।‘
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जिन 10 प्रतिष्ठानों से बच्चों को मुक्त कराया गया, उन्हें सील कर दिया गया है। इनके मालिकों के खिलाफ गिरफ्तारी की प्रक्रिया चल रही है। एसडीएम देवली ने चाइल्ड लेबर एक्ट, जेजे एक्ट, बान्डेड लेबर एक्ट और चाइल्ड ट्रैफिकिंग एक्ट के तहत कार्रवाई के आदेश दिए हैं। मेडिकल के बाद सभी बच्चों को बाल सुधार गृह भेज दिया गया है।


