नई दिल्ली। अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को एक भी मुकाबला खेलने का मौका नहीं मिला। सीरीज शुरू होने से पहले वैभव शानदार फॉर्म में थे। उन्होंने जिम्बाब्वे दौरे पर दमदार बल्लेबाजी करते हुए प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार हासिल किया था। इस दौरान उन्होंने 196.10 के शानदार स्ट्राइक रेट से 151 रन बनाए थे।
ऐसे में उम्मीद थी कि वैभव को अफगानिस्तान के खिलाफ भी भारतीय टीम की प्लेइंग-11 में जगह मिल सकती है। हालांकि, संजू सैमसन की वापसी के बाद वैभव को बाहर बैठना पड़ा। सीरीज के आखिरी मुकाबले में भी उन्हें मौका नहीं मिला और सैमसन ही विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर खेले। सीरीज खत्म होने के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर ने साफ किया कि वैभव की प्रतिभा पर किसी तरह का सवाल नहीं है, लेकिन उन्हें अपने मौके का इंतजार करना होगा।
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गंभीर ने बताया, सैमसन को क्यों मिली प्राथमिकता:
गंभीर ने कहा कि सैमसन ने भारतीय टीम के लिए पिछले कुछ वर्षों में अपनी क्षमता साबित की है। उन्होंने यह भी याद किया कि इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में सैमसन को बाहर रखना उनके कोचिंग करियर का सबसे मुश्किल फैसला था और उस समय वैभव को टीम में मौका दिया गया था। गंभीर के मुताबिक, टीम प्रबंधन विश्व कप में सफल रहे संयोजन पर वापस जाना चाहता था। उनका मानना है कि कुछ मैचों में खराब प्रदर्शन के कारण लंबे समय से अच्छा करने वाले खिलाड़ी अचानक खराब खिलाड़ी नहीं बन जाते।
उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि सैमसन ने दिखाया है कि वह क्या कर सकते हैं। कोई खिलाड़ी प्रतिभा के बिना विश्व कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट नहीं बन सकता, इसलिए उन्होंने काफी कुछ हासिल किया है। जाहिर तौर पर यह मुश्किल था- शायद मेरे कोचिंग करियर का सबसे मुश्किल फैसला था कि इंग्लैंड सीरीज में उन्हें बाहर रखा जाए, क्योंकि उससे पहले उन्होंने जिस तरह का प्रदर्शन किया था।’
गंभीर ने आगे कहा, ‘लेकिन फिर कभी-कभी आप खिलाड़ियों की फॉर्म के साथ भी जाते हैं। मेरे नजरिये से मैं उस संयोजन पर वापस जाना चाहता था, जो हमारे पास विश्व कप के दौरान था, क्योंकि तीन या चार असफलताओं के बाद वे खिलाड़ी खराब नहीं हो जाते। अगर कोई टीम एक विश्व कप से दूसरे विश्व कप तक अपराजित रही है और विश्व कप जीता है, तो अचानक एक सीरीज के बाद वह टीम खराब नहीं हो जाती और ये खिलाड़ी खराब खिलाड़ी नहीं बन जाते।’
सैमसन ने भी बनाए 117 रन:
अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में सैमसन ने भी अपने प्रदर्शन से टीम प्रबंधन के फैसले को सही ठहराने का मौका दिया। उन्होंने तीन मुकाबलों में दो अर्धशतक लगाए और कुल 117 रन बनाए। यही वजह रही कि वैभव को पूरी सीरीज के दौरान बाहर बैठना पड़ा। गंभीर ने कहा कि किसी खिलाड़ी के लंबे समय तक किए गए प्रदर्शन को देखते हुए उसे टीम में मौजूद किसी नए खिलाड़ी पर प्राथमिकता मिलना स्वाभाविक है।
‘वैभव को अपने मौके का इंतजार करना होगा’:
वैभव सूर्यवंशी को लेकर गंभीर ने साफ कर दिया कि टीम प्रबंधन उनकी प्रतिभा से पूरी तरह परिचित है। हालांकि, फिलहाल उन्हें धैर्य रखना होगा। गंभीर ने कहा कि जब वैभव को मौका मिलेगा तो उन्हें टीम में लंबा समय दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘वैभव के नजरिये से यह बहुत स्पष्ट बातचीत है कि उन्हें अपने मौके का इंतजार करना होगा। हम जानते हैं कि उनमें किस तरह की प्रतिभा है। हम जानते हैं कि वह क्या कर सकते हैं। लेकिन फिर भी, जो खिलाड़ी लंबे समय से बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, वह जाहिर तौर पर उस खिलाड़ी से आगे रहेगा, जिसने अभी टीम में जगह बनाई है। जब भी उसे मौका मिलेगा, आपको उसे लंबा समय भी देना होगा।’
गंभीर ने भारतीय क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा को जरूरी बताते हुए कहा, ‘यही भारतीय क्रिकेट है। हम प्रतिस्पर्धा चाहते हैं, हम ड्रेसिंग रूम में प्रतिभा चाहते हैं। लेकिन कभी-कभी क्रिकेट इसी तरह चलता है। चाहे आप 15 साल के हों या 30 साल के, आपको अपने मौके का इंतजार करना होता है।’
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अब जापान या एशियाई खेलों पर नजर:
अफगानिस्तान सीरीज में मौका नहीं मिलने के बाद अब वैभव के प्रशंसकों की नजर उनके अगले मौके पर होगी। भारत को जापान के खिलाफ टी20 मुकाबला खेलना है और एशियाई खेलों में भी भारतीय क्रिकेट टीम हिस्सा लेगी। वैभव ने जिस तरह जिम्बाब्वे दौरे पर बल्लेबाजी की थी, उसके बाद उनके प्रशंसक उन्हें एक बार फिर भारतीय जर्सी में मैदान पर देखने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, गंभीर के बयान से फिलहाल इतना साफ है कि टीम प्रबंधन वैभव को जल्दबाजी में उतारने के बजाय उनके मौके का इंतजार करने के पक्ष में है। मौका मिलने पर उन्हें लगातार मुकाबले देने का भरोसा भी मुख्य कोच ने दिया है।

