‘हनुमान अंश’ के बाद कैंची धाम जाने की सोच रहे हैं? निकलने से पहले जान लें पूरा सफर और जरूरी नियम

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नई दिल्ली। उत्तराखंड का कैंची धाम धार्मिक आस्था और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। नीम करौली बाबा से जुड़े इस आश्रम की लोकप्रियता फिल्म ‘हनुमान अंश’ के बाद भी चर्चा में है। शिप्रा नदी के किनारे स्थित इस धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अगर आप भी यहां जाने की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा से पहले पहुंचने के साधन, मौसम, दर्शन का समय और आश्रम से जुड़े नियमों की जानकारी रखना जरूरी है।

नैनीताल से कैंची धाम की दूरी करीब 17 किलोमीटर है। ट्रेन से आने वाले यात्रियों के लिए काठगोदाम नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जो करीब 38 किलोमीटर दूर स्थित है। दिल्ली से काठगोदाम के लिए ट्रेन उपलब्ध है। सड़क मार्ग से हल्द्वानी और भवाली होते हुए वाहन से धाम पहुंचा जा सकता है। आनंद विहार ISBT से नैनीताल के लिए बस लेकर वहां से स्थानीय वाहन से कैंची धाम जाया जा सकता है। हवाई यात्रा के लिए पंतनगर एयरपोर्ट सबसे नजदीकी विकल्प है, जहां से करीब 70 किलोमीटर की दूरी टैक्सी से तय करनी पड़ती है।

कैंची धाम जाने के लिए मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के बीच का समय सुविधाजनक माना जाता है। सितंबर में मौसम सामान्य तौर पर सुहावना रहता है, जबकि भारी बारिश के दौरान पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन और रास्ते बाधित होने की परेशानी हो सकती है। धाम में दर्शन सुबह 6:45 बजे से रात 8 बजे तक होते हैं। सुबह और शाम 7 बजे आरती होती है। मंगलवार को रात में कीर्तन के बाद आरती का आयोजन भी किया जाता है, जो करीब 9 बजे तक चलता है।

आश्रम में प्रवेश के दौरान श्रद्धालुओं को मर्यादित पहनावे का ध्यान रखने और परिसर की शांति बनाए रखने की जरूरत होती है। आश्रम के अंदर मोबाइल फोन या कैमरे से फोटो और वीडियो बनाने की अनुमति नहीं है। श्रद्धालु वहां बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ या राम नाम का जाप कर सकते हैं। ठहरने के लिए आश्रम में सीमित व्यवस्था होने के कारण पहले से बुकिंग करना बेहतर है। आसपास रहने के लिए नैनीताल और भीमताल में होटल या होमस्टे भी लिए जा सकते हैं। यात्रा पर निकलने से पहले ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित कर लेना सुविधाजनक रहेगा।