नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग ने महाराष्ट्र सरकार के भाषा विभाग के सहयोग से महाराष्ट्र मंत्रालय में एक कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में नागरिकों को उनकी पसंदीदा भाषाओं में डिजिटल सेवाओं, सरकारी सूचनाओं और उपयोगी एप्लिकेशन तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने में बहुभाषी एवं आवाज आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की संभावनाओं पर चर्चा की गई।कार्यशाला में समावेशी, सुलभ और नागरिक-केंद्रित डिजिटल शासन को बढ़ावा देने में भाषा आधारित एआई की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। मराठी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में भाषा प्रौद्योगिकी को आम नागरिकों के और करीब लाने की आवश्यकता रेखांकित की गई। प्रतिभागियों ने ऐसी डिजिटल प्रणालियां विकसित करने पर जोर दिया, जो लोगों की रोजमर्रा की भाषाओं को समझने, संसाधित करने और उनमें संवाद करने में सक्षम हों।
लाइव प्रदर्शन से दिखाई बहुभाषी एआई की क्षमता
भाषिनी की टीम ने कार्यशाला के दौरान वाक् पहचान, वाक्-से-पाठ, पाठ-से-वाक्, अनुवाद और आवाज आधारित संवाद जैसी तकनीकों का लाइव प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों के माध्यम से बताया गया कि बहुभाषी एआई तकनीक को सार्वजनिक सेवाओं में किस तरह एकीकृत किया जा सकता है। इससे नागरिकों और डिजिटल प्रणालियों के बीच संवाद को अधिक सहज, प्रभावी और समावेशी बनाया जा सकता है।
गुणवत्तापूर्ण भाषा डेटा को बताया अहम
कार्यशाला में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप एआई प्रणालियों के विकास के लिए उच्च गुणवत्ता वाले और प्रतिनिधि भाषा डेटा की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। भाषा विशेषज्ञों, सरकारी संस्थानों, शिक्षाविदों और समुदायों की भागीदारी बढ़ाकर भाषा डेटासेट को मजबूत करने और मराठी समेत अन्य भारतीय भाषाओं के लिए भाषा आधारित एआई को आगे बढ़ाने के अवसरों पर विचार किया गया।इस संदर्भ में भाषिनी की भीड़-स्रोत आधारित पहल ‘भाषादान’ को महत्वपूर्ण बताया गया। यह मंच नागरिकों को भाषा संबंधी डेटा उपलब्ध कराने और मजबूत भाषा संसाधन तैयार करने में योगदान देने का अवसर देता है।
विभागीय शब्दावली के अनुरूप एआई पर जोर
संवाद के दौरान विभाग-विशिष्ट भाषा आधारित एआई विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। सरकारी विभागों में इस्तेमाल होने वाली विशेष शब्दावली को एआई प्रणालियों में शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया गया। ऐसी प्रणालियां सरकारी सामग्री को समझने और संसाधित करने के साथ-साथ सार्वजनिक सेवाओं में बहुभाषी संचार को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।
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महाराष्ट्र केंद्रित बहुभाषी एआई इकोसिस्टम की संभावना
कार्यशाला में महाराष्ट्र केंद्रित बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसके तहत प्रस्तावित ‘महाभाषिनी’ अवधारणा पर विचार किया गया, जिसके जरिए पर्यटन, परिवहन और अन्य सार्वजनिक सेवाओं में भाषा-समावेशी डिजिटल अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सकता है।कार्यशाला ने महाराष्ट्र सरकार और भाषिनी के बीच प्राथमिकता वाले उपयोग के मामलों तथा भविष्य में सहयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान का अवसर भी प्रदान किया।
केंद्र-राज्य सहयोग को मिलेगी मजबूती
कार्यक्रम में सरकारी अधिकारियों, भाषा विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान भाषा प्रौद्योगिकी, भाषा डेटासेट, अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक उपयोग से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।महाराष्ट्र मंत्रालय में आयोजित यह कार्यशाला समावेशी बहुभाषी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में केंद्र और राज्य के बीच सहयोग को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य भाषा को डिजिटल सेवाओं तक पहुंच, नागरिक भागीदारी और डिजिटल सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनाना है।
36 भारतीय पाठ भाषाओं और 23 भारतीय ध्वनि भाषाओं को समर्थन
डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के अंतर्गत डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित बहुभाषी डिजिटल समावेशन के लिए राष्ट्रीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है। भाषिनी 36 भारतीय पाठ भाषाओं, 23 भारतीय ध्वनि भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को समर्थन देता है।भाषिनी के माध्यम से 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को संचालित किया जा रहा है और अब तक 9 अरब से अधिक संचयी कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुमान सक्षम किए जा चुके हैं। यह प्रतिदिन 2.4 करोड़ से अधिक एआई अनुमानों को संसाधित करता है। इसका उद्देश्य भाषा आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को अधिक सुलभ और समावेशी बनाना है।
