रेलवे का नया ग्रीन मिशन: 110 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी हाइड्रोजन ट्रेन, दूसरे रूटों पर भी विस्तार की तैयारी

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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ सतीश कुमार ने रविवार को बताया कि ट्रेन के संचालन को सिर्फ एक रेल खंड तक सीमित रखने के बजाय भविष्य में दूसरे मार्गों पर भी इसके विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम
हाइड्रोजन ट्रेन को भारतीय रेलवे के ग्रीन ट्रांसपोर्ट मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इस तकनीक का उद्देश्य पारंपरिक डीजल ईंधन पर निर्भरता कम करना और रेल परिवहन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाना है।हाइड्रोजन आधारित ट्रेन में ईंधन के जरिए बिजली पैदा की जाती है, जिसका इस्तेमाल ट्रेन को चलाने में होता है। इस प्रक्रिया में पारंपरिक डीजल ट्रेन की तुलना में प्रत्यक्ष उत्सर्जन को काफी कम किया जा सकता है।

110 किमी/घंटे की होगी अधिकतम रफ्तार
रेलवे की कोशिश है कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 110 किमी प्रति घंटे तक की गति से संचालित हो। हालांकि नियमित संचालन से पहले ट्रेन की तकनीक, ब्रेकिंग सिस्टम, ऊर्जा उत्पादन, ईंधन प्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक परीक्षण किया जाएगा।इसके अलावा अलग-अलग मौसम और रेल मार्ग की परिस्थितियों में ट्रेन के प्रदर्शन को भी परखा जाएगा। यात्रियों की सुविधा और आपात स्थिति से निपटने के इंतजामों को भी परीक्षण का हिस्सा बनाया जाएगा।

दूसरे रेल मार्गों पर भी चलाने की योजना
रेलवे का फोकस सिर्फ पहली हाइड्रोजन ट्रेन को सफलतापूर्वक चलाने तक सीमित नहीं है। शुरुआती संचालन से मिले अनुभवों के आधार पर भविष्य में दूसरे रेल खंडों पर भी ऐसी ट्रेनों को चलाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।हालांकि किन मार्गों को इसके लिए चुना जाएगा, इसका फैसला तकनीकी और परिचालन अध्ययन के बाद किया जाएगा। नए मार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेन शुरू करने से पहले ईंधन की उपलब्धता, सुरक्षित भंडारण, ईंधन भरने की व्यवस्था, रखरखाव और प्रशिक्षित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं विकसित करनी होंगी।

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हाइड्रोजन ट्रेन के सामने सुरक्षा बड़ी चुनौती
हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील गैस है। ऐसे में इसके भंडारण, परिवहन और ट्रेन में इस्तेमाल के दौरान कड़े सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी होगा।रेलवे को ट्रेन की तकनीक के साथ-साथ उससे जुड़े पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को भी सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना होगा। आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार करना भी महत्वपूर्ण होगा।

ग्रीन हाइड्रोजन से बढ़ेगा पर्यावरणीय फायदा
हाइड्रोजन ट्रेन से मिलने वाला पर्यावरणीय लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि इस्तेमाल होने वाला हाइड्रोजन किस तरीके से तैयार किया जाता है। यदि इसके लिए ग्रीन हाइड्रोजन, यानी नवीकरणीय ऊर्जा से उत्पादित हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है, तो इसके पर्यावरणीय फायदे और बढ़ सकते हैं।भारत पहले से ही ग्रीन हाइड्रोजन की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। ऐसे में रेलवे में हाइड्रोजन तकनीक का इस्तेमाल देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के साथ भी जुड़ सकता है।

लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी नजर
हाइड्रोजन ट्रेन के बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए सिर्फ तकनीक का सफल होना पर्याप्त नहीं होगा। हाइड्रोजन उत्पादन की लागत, ईंधन की उपलब्धता, स्टोरेज सिस्टम, रखरखाव और नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला खर्च भी अहम भूमिका निभाएगा।रेलवे के लिए शुरुआती परीक्षण और संचालन से मिलने वाले परिणाम यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि हाइड्रोजन ट्रेन को कितने बड़े स्तर पर और किन मार्गों पर विस्तार दिया जा सकता है।