चंडीगढ़ में राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों की 16वीं राष्ट्रीय बैठक शुरू
चंडीगढ़ । राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों की 16वीं राष्ट्रीय बैठक का रविवार को चंडीगढ़ में शुभारंभ हुआ। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की ओर से आयोजित दो दिवसीय बैठक 6 और 7 सितंबर को होगी। इसमें देशभर के राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के अध्यक्ष एवं सदस्य सचिवों के अलावा वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं।बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता शासन व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने, संस्थागत तंत्र को मजबूत करने तथा संरक्षण के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर विचार-विमर्श करना है।उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने की। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह सहित मंत्रालय और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक दृष्टिकोण के समन्वय पर जोर
गुलाब चंद कटारिया ने भारत की समृद्ध जैविक विरासत और पारंपरिक पर्यावरणीय मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि पारिस्थितिक सुरक्षा का सीधा संबंध खाद्य एवं जल सुरक्षा, आजीविका और सतत विकास से है। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण में आधुनिक दृष्टिकोण के साथ पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक भागीदारी को जोडऩे की आवश्यकता पर बल दिया।उन्होंने आर्द्रभूमियों, नदी पारिस्थितिकी तंत्रों और कृषि जैव विविधता के महत्व को रेखांकित करते हुए जैव विविधता प्रबंधन समितियों और जन जैव विविधता रजिस्टरों को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने जैव विविधता से जुड़े संस्थानों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय का भी आह्वान किया।
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संशोधित जैव विविधता शासन व्यवस्था के अनुरूप नियम बनाने राज्यों से आग्रह
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने भारत की दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण परंपरा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई मिशन लाइफ, ‘एक पेड़ मां के नाम , अमृत सरोवर और ग्रीन क्रेडिट जैसी पहलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत वैज्ञानिक क्षमता के साथ पारंपरिक सामुदायिक ज्ञान को भी संरक्षण के प्रयासों में साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।जैव विविधता अधिनियम, 2002 का उल्लेख करते हुए यादव ने कहा कि जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 और जैव विविधता नियम, 2024 ने देश की जैव विविधता शासन व्यवस्था को अधिक मजबूत और सुव्यवस्थित किया है। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपने नियमों, संस्थागत व्यवस्थाओं और कार्यान्वयन प्रक्रियाओं को संशोधित राष्ट्रीय ढांचे के अनुरूप बनाने का आग्रह किया।
जन जैव विविधता रजिस्टरों को बनाया जाए गतिशील नियोजन का माध्यम
भूपेंद्र यादव ने जमीनी स्तर पर जैव विविधता संरक्षण को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने 27.6 लाख से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों को सक्रिय और प्रभावी बनाने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि जन जैव विविधता रजिस्टरों को केवल दस्तावेज के रूप में सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें स्थानीय निकायों के लिए गतिशील नियोजन उपकरण के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इससे स्थानीय जैव विविधता और उससे जुड़े पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण होगा तथा इसका उपयोग स्थानीय नियोजन और सतत विकास में किया जा सकेगा।
पहुंच और लाभ साझाकरण से समुदायों को मिले ठोस लाभ
मंत्री ने पहुंच एवं लाभ साझाकरण व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की ओर से किए गए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण ने पहुंच एवं लाभ साझाकरण निधि के 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों, स्थानीय समुदायों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, राज्य जैव विविधता बोर्डों, केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों और अनुसंधान संस्थानों के साथ साझा की है।उन्होंने कहा कि पहुंच एवं लाभ साझाकरण की व्यवस्था का उद्देश्य संरक्षण और सतत आजीविका को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय समुदायों को ठोस लाभ पहुंचाना होना चाहिए। इस अवसर पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की पिछले एक वर्ष की उपलब्धियों और पहुंच एवं लाभ साझाकरण योजना से संबंधित सामग्री भी जारी की गई।
जलवायु परिवर्तन से निपटने में जैव विविधता संरक्षण अहम
भूपेंद्र यादव ने जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने ‘संपूर्ण सरकारÓ और ‘संपूर्ण समाजÓ के दृष्टिकोण के साथ आगे बढऩे की आवश्यकता बताई।उन्होंने भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्य योजना 2024-2030 का उल्लेख किया, जो कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के अनुरूप है। उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, प्रजातियों एवं पर्यावासों के संरक्षण, कृषि जैव विविधता तथा जलवायु-अनुकूल परिदृश्यों के क्षेत्र में मापने योग्य परिणाम हासिल करने पर जोर दिया।उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से वैश्विक 30-बाय-30 संरक्षण लक्ष्य में सक्रिय भागीदार बनने का भी आह्वान किया।
हरियाणा ने संरक्षण प्रयासों की जानकारी साझा की
हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने राज्य में जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने राज्य और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण में जैव विविधता प्रबंधन समितियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए समितियों और स्थानीय समुदायों के प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण को बढ़ाने का आह्वान किया।
अनुभव और नवाचार साझा करने का मंच
दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में अपने अनुभव, नवाचार और कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों को साझा करने का अवसर प्रदान कर रही है। बैठक में जैव विविधता शासन व्यवस्था को मजबूत करने के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा होगी।
बैठक से संस्थागत तंत्र को मजबूत करने, जैव विविधता प्रबंधन समितियों के कामकाज में सुधार, जन जैव विविधता रजिस्टरों की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने तथा संबंधित अधिकारियों और समुदायों की क्षमता निर्माण को गति मिलने की उम्मीद है। इससे राज्य और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता शासन व्यवस्था के अधिक प्रभावी क्रियान्वयन को भी बल मिलेगा।
