विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब हर राज्य, जिला और गांव का समग्र विकास हो : सी.पी. राधाकृष्णन

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मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन से नक्सलवाद का खतरा समाप्त हुआ 

रायपुर। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर छत्तीसगढ़ के भय और अभाव के दौर से निकलकर शांति, प्रगति और अवसरों की ओर बढऩे की यात्रा का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खतरे को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन के बल पर समाप्त किया गया है।

उपराष्ट्रपति बुधवार को एम्स रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्नातक छात्रों से देशवासियों के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की रक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी संभालने का क्षण भी है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज उन्हें डिग्रियां मिल रही हैं, लेकिन कल उन्हें इससे कहीं अधिक मूल्यवान जिम्मेदारी सौंपी जाएगी—भारत की जनता के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की रक्षा की जिम्मेदारी।

मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बना एम्स रायपुर
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2012 में स्थापना के बाद से एम्स रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बेहद कम समय में यह संस्थान छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों के लिए प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर ग्रामीण और आदिवासी समुदायों तक भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्थान का विकास छत्तीसगढ़ में हो रहे व्यापक बदलाव को भी दर्शाता है।

नक्सलवाद के कारण विकास में आई थी बाधा
छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में दशकों तक चली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, खराब आवागमन व्यवस्था और वामपंथी उग्रवाद ने विकास की राह में गंभीर बाधाएं खड़ी कीं। कई दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में भय तथा हिंसा के कारण सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि इसके चलते लोगों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने के लिए दूरी और अभाव का सामना करना पड़ता था।

राधाकृष्णन ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब अपने अतीत के अंधकार से निकलकर समृद्धि, विकास और प्रगति के नए युग की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रतिबद्ध नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा कि दशकों से चले आ रहे नक्सली खतरे का अंत हुआ है और जिन क्षेत्रों को कभी हिंसा के लिए जाना जाता था, वे अब सड़क, स्कूल, अस्पताल, बेहतर संपर्क व्यवस्था, निवेश और नए अवसरों के लिए पहचाने जा रहे हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह परिवर्तन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन किसी क्षेत्र में कितना बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

उन्नत चिकित्सा सेवाओं में एम्स रायपुर की उपलब्धियों की सराहना
उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को नए छत्तीसगढ़ के बेहतरीन प्रतीकों में से एक बताते हुए संस्थान की उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं और प्रत्यारोपण चिकित्सा के क्षेत्र में उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में किए गए पहले किडनी प्रत्यारोपण, किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर, कॉर्निया प्रत्यारोपण और कान प्रत्यारोपण जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां दर्शाती हैं कि उन्नत चिकित्सा सुविधाएं अब इस क्षेत्र में तेजी से सुलभ हो रही हैं। हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी को भी उन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।


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हर राज्य, जिला और गांव का विकास जरूरी
विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए संतुलित विकास की आवश्यकता पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना तभी साकार हो सकती है, जब देश के प्रत्येक राज्य, जिले और गांव का विकास सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने उच्च शिक्षा तक पहुंच को विकसित भारत की परिकल्पना का मूल आधार बताया और पिछले 12 वर्षों के दौरान उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुए विस्तार का उल्लेख किया।

उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी में हुई उल्लेखनीय वृद्धि को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिला नामांकन 1.57 करोड़ था, जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया। यह 42.2 प्रतिशत की वृद्धि है। एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में भी महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही। समारोह में 376 महिला और 313 पुरुष विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं।

युवाओं से नशीली दवाओं से दूर रहने का आह्वान
स्नातक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने युवाओं से हमेशा दृढ़ता के साथ नशीली दवाओं को ना कहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसे भारत के निर्माण में योगदान देना चाहिए, जहां प्रौद्योगिकी प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे और हर युवा बेहतर भविष्य की आकांक्षा कर सके।
उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि उनका ज्ञान लोगों को स्वास्थ्य प्रदान करे, उनका शोध नवाचार को बढ़ावा दे और उनकी सेवा दूसरों के लिए प्रेरणा बने।


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उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को चिकित्सा उत्कृष्टता, वैज्ञानिक नवाचार, जन स्वास्थ्य और करुणापूर्ण सेवा के क्षेत्र में निरंतर सफलता की शुभकामनाएं दीं।उन्होंने उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ का परिवर्तन वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित होगा। समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र भी प्रदान किए।

ये रहे मौजूद
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल, एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा और एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।