*संजना सांघी बर्थडे स्पेशल: ‘दिल बेचारा’ की किज़ी बसु से ‘ओम’ की काव्या और ‘कड़क सिंह’ की साक्षी तक, 6 साल का सफर, ग्लोबल पहचान और यूएन में यूथ एडवोकेसी*
मुंबई। जब साल 2020 में दिल बेचारा रिलीज़ हुई, तो संजना सांघी ने किज़ी बसु के किरदार से लाखों दिलों में अपनी खास जगह बना ली। उनकी परफॉर्मेंस में भावनाओं की गहराई, मासूमियत और उम्मीद की एक खूबसूरत झलक देखने को मिली। बतौर लीड एक्टर अपने सफर के छह साल पूरे कर चुकीं संजना आज सिर्फ एक वर्सेटाइल अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और यूथ एडवोकेसी की एक मजबूत आवाज़ के तौर पर भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। एक नई अभिनेत्री से लेकर एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखने वाली कलाकार तक का उनका सफर सोच-समझकर किए गए क्रिएटिव चॉइसेज़ और समाज के लिए कुछ करने की उनकी लगातार कोशिश को दर्शाता है।
दिल बेचारा के बाद संजना ने खुद को किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अलग-अलग जॉनर और चुनौतीपूर्ण कहानियों को चुना। एक्शन थ्रिलर ओम: द बैटल विदिन में उन्होंने एक बिल्कुल अलग और एनर्जी से भरपूर अंदाज़ दिखाया, वहीं कड़क सिंह में पंकज त्रिपाठी के साथ उनके काम को काफी सराहना मिली। फिल्म में साक्षी के किरदार के जरिए उन्होंने भावनात्मक रूप से एक बेहद संवेदनशील और जटिल रिश्ते को खूबसूरती से पर्दे पर उतारा। ऐसे किरदारों के चुनाव के साथ संजना ने यह साबित किया कि वह अलग-अलग तरह की कहानियों को अपने अंदाज़ में निभाने की क्षमता रखती हैं।
संजना की पहचान सिर्फ सिनेमा तक सीमित नहीं है। वह ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार अपनी आवाज़ बुलंद करती रही हैं। वह संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) को संबोधित करने वाली सबसे कम उम्र की भारतीयों में शामिल रही हैं और वर्ल्ड बैंक की ओर से यूथ-लेड डेवलपमेंट की एक प्रमुख आवाज़ के तौर पर भी पहचानी गई हैं। इसके अलावा, उन्होंने जॉन लीजेंड के साथ मिलेनियम कैंपस नेटवर्क के बोर्ड ऑफ एडवाइजर्स का हिस्सा बनकर ग्लोबल यूथ डेवलपमेंट से जुड़े मुद्दों पर काम किया है। वे यूएन के यंग लीडर्स फॉर द सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजीज़) के डिस्टिंग्विश्ड जज के तौर पर भी काम कर चुकी हैं, जहाँ उनके साथ मलाला यूसुफज़ई जैसी ग्लोबल हस्तियाँ भी जुड़ी रही हैं।
संजना का सामाजिक योगदान पब्लिक हेल्थ और जेंडर इक्वालिटी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों तक भी फैला हुआ है। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने ‘हियर टू हियर’ नाम की एक क्राइसिस रिस्पॉन्स पहल शुरू की, जिसके जरिए युवाओं को क्वालिफाइड मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स और रिमोट काउंसलिंग रिसोर्सेस तक मुफ्त पहुँच प्रदान करने की कोशिश की गई। इसके अलावा, वह अपने नेशनल और इंटरनेशनल स्पीकिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए जेंडर इक्वालिटी, मेंस्ट्रुअल हाइजीन और यूथ-लेड सोशल इनोवेशन जैसे मुद्दों पर भी लगातार बात करती रही हैं।
संजना सांघी का अब तक का सफर इस बात की मिसाल है कि एक कलाकार अपनी क्रिएटिव जर्नी के साथ समाज के लिए अपनी जिम्मेदारी को भी बखूबी निभा सकता है। सिनेमा में अलग-अलग किरदारों के जरिए अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ, ग्लोबल मंचों पर युवाओं और सामाजिक बदलाव से जुड़े मुद्दों की आवाज़ बनकर संजना ने अपनी एक अलग पहचान कायम की है। उनके लिए विरासत सिर्फ पर्दे पर निभाए गए किरदारों से नहीं, बल्कि ऑफ-स्क्रीन लोगों और समाज पर डाले गए सकारात्मक प्रभाव से भी बनती है।
