रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल में बुधवार को स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के संचालन का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार से प्रदेश में संचालित आत्मानंद स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं की स्थिति और शिक्षकों को लेकर सवाल किए।
डॉ. महंत ने पूछा कि प्रदेश में वर्तमान में कितने अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हैं, नर्सरी कक्षाएं प्रारंभ करने की स्वीकृति कब प्रदान की गई और वर्तमान में कितने स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं चल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई जिलों से प्री-प्राइमरी शिक्षकों को हटाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों में चिंता है।
इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री ने सदन को बताया कि प्रदेश के किसी भी जिले में अभी तक शिक्षकों को नहीं हटाया गया है। फिलहाल 14 जिलों के 54 स्वामी आत्मानंद स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि नए शिक्षा सत्र से आत्मानंद स्कूलों में प्री-नर्सरी कक्षाओं में नए विद्यार्थियों का प्रवेश नहीं लिया जाएगा।
डीएलएफ फंड के प्रावधान में बदलाव के कारण प्री-प्राइमरी व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है, जिसके चलते भविष्य में प्री-प्राइमरी शिक्षकों की व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
सरकार ने सदन में यह भी जानकारी दी कि नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश में लगभग 11 हजार बालवाड़ी स्कूल खोले जाने की योजना है। इन बालवाड़ी स्कूलों में छोटे बच्चों के लिए प्रारंभिक शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी, ताकि उन्हें शुरुआती स्तर पर ही शिक्षा से जोड़ा जा सके।
आत्मानंद स्कूलों में प्री-नर्सरी एडमिशन बंद करने के फैसले को लेकर सदन में चर्चा तेज रही। विपक्ष ने इसे बच्चों और शिक्षकों के हितों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से स्पष्ट नीति लाने की मांग की। वहीं सरकार ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप पूरे सिस्टम में चरणबद्ध बदलाव किए जा रहे हैं।
