नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 1983 का वर्ल्ड कप एक ऐसा अध्याय है, जिसने देश में क्रिकेट की तस्वीर बदल दी। इस ऐतिहासिक जीत में यशपाल शर्मा का योगदान बेहद अहम रहा। अपनी मजबूत तकनीक और दबाव में टिककर खेलने की क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले यशपाल ने बड़े मुकाबलों में टीम को संभालने का काम किया।
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11 अगस्त 1954 को लुधियाना में जन्मे यशपाल ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम तक जगह बनाई। करीब दो दशक के प्रथम श्रेणी करियर में उन्होंने 160 मैच खेलकर 8,933 रन बनाए, जिसमें 21 शतक और 46 अर्धशतक शामिल रहे। भारत के लिए उन्होंने 37 टेस्ट और 42 वनडे मुकाबले खेले। टेस्ट में उनके नाम 1,606 रन रहे, जबकि वनडे में उन्होंने 883 रन बनाए। इंग्लैंड के खिलाफ 1981-82 में उनकी 140 रन की पारी और जीआर विश्वनाथ के साथ बड़ी साझेदारी आज भी याद की जाती है।
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1983 वर्ल्ड कप में यशपाल ने 8 मैचों में 240 रन बनाए। वेस्टइंडीज के खिलाफ 89 और सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 61 रन की पारियां उनकी सबसे चर्चित पारियों में रहीं। क्रिकेट से संन्यास के बाद भी उनका जुड़ाव खेल से बना रहा। उन्होंने कोच, कमेंटेटर और राष्ट्रीय चयनकर्ता के रूप में जिम्मेदारियां संभालीं। 13 जुलाई 2021 को उनके निधन से भारतीय क्रिकेट ने एक जुझारू खिलाड़ी को खो दिया।
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