आगरा। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना हर मॉडल और ब्यूटी क्वीन का सपना होता है। आगरा की रहने वाली अवनी गुप्ता ने मिस सुप्रानेशनल 2026 में भारत की ओर से हिस्सा लेकर इस सपने को जिया और 67 देशों की प्रतिभागियों के बीच टॉप-12 में जगह बनाई। 31 जुलाई 2026 को पोलैंड के नोवी सॉंच में आयोजित ग्रैंड फिनाले में फिलीपींस की कैटरीना लेगाडो ने खिताब अपने नाम किया, जबकि अवनी ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की उनकी कहानी सिर्फ ग्लैमर और कैमरों की चमक तक सीमित नहीं है। इसके पीछे लंबे समय की मेहनत, मानसिक दबाव, अनुशासन और अपने सपने के लिए सुरक्षित करियर छोड़ने का बड़ा फैसला शामिल है। मॉडलिंग में आने से पहले अवनी डेलॉयट में ऑडिटर के तौर पर काम कर चुकी हैं। एक तरफ उनके पास स्थिर कॉर्पोरेट करियर था और दूसरी ओर बचपन का वह सपना था, जिसे वह अपनी मां के साथ घर पर रैंप वॉक की प्रैक्टिस करते हुए देखा करती थीं। उनकी मां भी कभी मिस इंडिया बनकर भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती थीं, लेकिन परिस्थितियों के कारण उनका सपना पूरा नहीं हो सका। बेटी के सपने को उन्होंने पूरा समर्थन दिया। आखिरकार अवनी ने नौकरी छोड़कर मॉडलिंग और ब्यूटी पेजेंट की दुनिया को चुना। इसके बाद फिटनेस, ग्रूमिंग, रैंप वॉक, पब्लिक स्पीकिंग और इंटरव्यू राउंड की तैयारी के जरिए उन्होंने खुद को अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए तैयार किया।
मिस सुप्रानेशनल 2026 में टॉप-12 तक पहुंचना अवनी के लिए बड़ी उपलब्धि रही। उन्होंने मंच पर अपनी खूबसूरती के साथ आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और स्टेज प्रेजेंस का भी प्रदर्शन किया। नेशनल कॉस्ट्यूम राउंड में उन्होंने डिजाइनर अमरीन खान का तैयार किया हुआ गहरे लाल रंग का रॉ सिल्क और ऑर्गेंजा लहंगा पहना, जबकि ग्रैंड फिनाले में डिजाइनर भावना राव का मेरलॉट शेड का कस्टम गाउन पहनकर भारतीय फैशन और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश किया। अवनी की पहचान केवल ब्यूटी पेजेंट तक सीमित नहीं है। कॉलेज के दौरान दृष्टिबाधित छात्रों के साथ काम करने के अनुभव के बाद उन्होंने ‘Beyond Sight, Beyond Limits’ नाम से एक पहल शुरू की, जिसका उद्देश्य दृष्टिबाधित लोगों को करियर गाइडेंस, काउंसलिंग और बेहतर अवसरों की दिशा में मदद करना है। उनके परिवार ने भी पूरे सफर में उनका साथ दिया। अवनी की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सुरक्षित करियर और अपने सपनों के बीच उलझे हुए हैं। उन्होंने साबित किया कि कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने का साहस, लगातार मेहनत और अपने लक्ष्य पर भरोसा किसी भी सपने को नई ऊंचाई तक ले जा सकता है। उनके लिए यह सफर सिर्फ ताज जीतने का नहीं, बल्कि अपनी पहचान बनाने, भारत का प्रतिनिधित्व करने और अपने मंच का इस्तेमाल सकारात्मक बदलाव के लिए करने का भी है।
