NEET पेपर लीक विवाद पर राघव चड्ढा का संसद में जोरदार भाषण, बोले- ‘कैंसर का इलाज क्रोसिन से नहीं, संस्थागत सुधार से होगा’

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नई दिल्ली। NEET पेपर लीक मामले को लेकर पिछले कई हफ्तों से जारी विवाद के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में अपनी प्रतिक्रिया दी है। पब्लिक एग्जामिनेशंस (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान उन्होंने पेपर लीक की समस्या, छात्रों की चिंताओं और परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। राघव चड्ढा ने कहा कि अब उनकी भूमिका पहले से अलग है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए सवाल उठाना उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन अब सत्ता पक्ष में होने के कारण उनकी जिम्मेदारी समाधान देने की है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का हल केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं निकाला जा सकता, बल्कि इसके लिए मजबूत कानून, पारदर्शी व्यवस्था और संस्थागत सुधार जरूरी हैं।

राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक केवल एक परीक्षा से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह लाखों छात्रों की मेहनत, भरोसे और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि छात्र कई वर्षों तक दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन यदि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हो जाता है तो उनकी मेहनत और उम्मीदों को बड़ा नुकसान पहुंचता है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “जैसे कैंसर का इलाज क्रोसिन से नहीं हो सकता, वैसे ही पेपर लीक जैसी गंभीर बीमारी का समाधान केवल बयान या साउंडबाइट्स से नहीं किया जा सकता। इसके लिए वास्तविक संस्थागत सुधार की जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि पब्लिक एग्जामिनेशंस (अमेंडमेंट) बिल, 2026 परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, यह कानून पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने, दोषियों पर कार्रवाई करने और छात्रों के हितों की रक्षा करने में मदद करेगा। राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं का असर सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रहता। इससे छात्रों का आत्मविश्वास, मानसिक स्थिति और भविष्य की योजनाएं प्रभावित होती हैं। उन्होंने कहा कि एक कैमरा फोन से पेपर की तस्वीर खींचकर, व्हाट्सऐप या टेलीग्राम जैसे माध्यमों से उसे फैलाना लाखों छात्रों के साथ अन्याय है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों की चिंताओं को सुना गया है और सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों का दर्द वास्तविक है और उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। राज्यसभा सांसद ने कहा कि पेपर लीक के मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह किसी एक राज्य, पार्टी या सरकार की समस्या नहीं है, बल्कि देश की परीक्षा व्यवस्था की पुरानी चुनौती है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों को मिलकर इसका स्थायी समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मायने नहीं रखना चाहिए कि पेपर लीक किस राज्य में हुआ, उस समय किस पार्टी की सरकार थी या कौन मंत्री जिम्मेदार था। प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था मिले।

राघव चड्ढा ने छात्रों के अधिकारों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने, अपनी मांग रखने और न्याय के लिए अदालत जाने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के आंदोलन को किसी राजनीतिक दल के मंच में बदलने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की लड़ाई परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने की है, जबकि राजनीतिक दलों की अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं हो सकती हैं। इसलिए छात्रों को अपनी आवाज खुद उठानी चाहिए और अपने मुद्दों को केंद्र में रखना चाहिए।