आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम, परिवार और जिम्मेदारियों के बीच खुद के लिए समय निकालना भूल जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वेलनेस एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि रोज़ाना सिर्फ 60 मिनट अपने शरीर, मन और आत्मा के लिए निकाले जाएं, तो इसका सकारात्मक असर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रोज़ 20 से 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि, जैसे तेज़ चाल से टहलना, साइकिल चलाना, घर पर हल्का व्यायाम या डांस करना, हृदय को स्वस्थ रखने, ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने और मेटाबॉलिज्म बेहतर बनाने में मदद करता है। नियमितता किसी भी कठिन वर्कआउट से अधिक प्रभावी मानी जाती है।
इसके अलावा, दिन में 10 से 15 मिनट मेडिटेशन, गहरी सांस लेने का अभ्यास या कुछ देर बिना मोबाइल और स्क्रीन के शांत बैठना दिमाग को आराम देता है। इससे तनाव कम होता है, फोकस बढ़ता है और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, दिन का कुछ समय बिना किसी लक्ष्य या डेडलाइन वाले कामों के लिए भी रखना चाहिए। किताब पढ़ना, डायरी लिखना, बागवानी करना, पेंटिंग, संगीत सुनना या सिर्फ एक कप चाय के साथ सुकून के पल बिताना मानसिक शांति और भावनात्मक मजबूती बढ़ाने में सहायक होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रोज़ाना खुद को दिया गया यह एक घंटा केवल आराम नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और खुशहाल जीवन की ओर एक महत्वपूर्ण निवेश है।
