कांकेर। जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर मामला सामने आया है। नरहरपुर विकासखंड के ग्राम मर्रामपानी स्थित शासकीय प्राथमिक शाला डोकरानाला में प्रधान पाठक के शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत और वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बड़ी कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार, घटना सोमवार की बताई जा रही है। ग्रामीण जब स्कूल पहुंचे तो वहां पदस्थ प्रधान पाठक शोभाराम ध्रुव कथित रूप से नशे की हालत में मिले। ग्रामीणों ने पूरे मामले का वीडियो बनाकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भेजा और इसकी शिकायत की।
ग्रामीणों का आरोप है कि पूछताछ के दौरान प्रधान पाठक ने शराब पीने की बात भी स्वीकार की। सामने आए वीडियो में प्रधान पाठक स्कूल परिसर और कक्षा के अंदर दिखाई दे रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू की। बताया जा रहा है कि डोकरानाला का प्राथमिक स्कूल जंगल क्षेत्र में स्थित है, जहां आदिवासी पारधी समाज के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इस स्कूल में वर्तमान में केवल चार बच्चे दर्ज हैं, जबकि तीन शिक्षक पदस्थ हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में नियमित रूप से पढ़ाई नहीं होती और इससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी स्कूल में लापरवाही से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। बच्चों से पानी भरवाने जैसी शिकायतें भी ग्रामीणों द्वारा की गई थीं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर पालकों ने भी चिंता जताई है। घटना के बाद ग्रामीणों और पालकों की मौजूदगी में पंचनामा तैयार किया गया, जिसे खंड शिक्षा अधिकारी को भेजा गया। इसके बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच कर जिला शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट सौंपी।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी के प्रतिवेदन के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी रमेश कुमार निषाद ने कार्रवाई करते हुए प्रधान पाठक शोभाराम ध्रुव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शिक्षा विभाग ने उन्हें कर्तव्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता का दोषी मानते हुए यह कार्रवाई की है। निलंबन अवधि के दौरान प्रधान पाठक का मुख्यालय कार्यालय खंड शिक्षा अधिकारी कोयलीबेड़ा निर्धारित किया गया है। विभाग की ओर से बताया गया कि यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत की गई है।
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता है। शिक्षकों द्वारा कर्तव्य में लापरवाही या अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। ग्रामीणों ने विभाग की कार्रवाई का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि स्कूल में अब शिक्षा व्यवस्था बेहतर होगी और बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाई का लाभ मिलेगा। वहीं विभाग ने भी जिले के अन्य स्कूलों में निरीक्षण और निगरानी बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
