दुबई। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए तत्काल प्रभाव से नौसैनिक नाकेबंदी लागू करने की घोषणा की है। रॉयटर्स के मुताबिक संगठन के सैन्य प्रवक्ता ने टेलीविजन पर प्रसारित बयान में कहा कि अब सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री प्रतिबंध लागू रहेगा। हूती विद्रोहियों ने इसे ‘आंख के बदले आंख’ की नीति के तहत उठाया गया कदम बताया है। इस घोषणा के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
हूती विद्रोहियों ने क्यों लिया ये फैसला?
हूती विद्रोहियों का आरोप है कि सऊदी अरब ने उनके नियंत्रण वाले इलाकों पर जमीन, समुद्र और हवाई मार्ग से व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं। इस दौरान उनके बंदरगाहों और हवाई अड्डों को भी लंबे समय तक बाधित किया गया और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया गया। इसी कारण अब सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करने का फैसला किया गया है।
क्या हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष बढ़ा?
पिछले सप्ताह हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल हमले किए थे। संगठन ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने उनके नियंत्रण वाले एक हवाई अड्डे पर बमबारी की है। हूती विद्रोहियों का दावा है कि इसी घटना के बाद उन्होंने जवाबी कार्रवाई की। इन मिसाइल हमलों ने दोनों पक्षों के बीच पिछले कुछ वर्षों से बनी अपेक्षाकृत शांत स्थिति को फिर से तनावपूर्ण बना दिया है।
चार साल के युद्धविराम पर क्या असर पड़ सकता है?
मार्च 2022 में अनौपचारिक युद्धविराम लागू होने के बाद यह पहला मौका है जब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की जिम्मेदारी ली है। इससे पहले हूती संगठन ने सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया था, जिसके बाद संघर्ष में कुछ समय के लिए कमी आई थी। अब नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा और हालिया मिसाइल हमलों के बाद यह आशंका बढ़ गई है कि दोनों पक्षों के बीच तनाव फिर से तेज हो सकता है। यदि हालात नहीं सुधरे तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है।
