रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) के जनरल सर्जरी विभाग ने एक अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण ट्रॉमा केस का सफल इलाज कर गंभीर रूप से घायल मरीज की जान बचा ली। गरियाबंद जिले के निवासी मरीज को पीठ के रास्ते पेट में तीर धंसने के बाद गंभीर अवस्था में उच्च स्तरीय उपचार के लिए मेकाहारा रेफर किया गया था। जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह ने बताया कि प्रारंभिक चिकित्सकीय परीक्षण और आवश्यक जांच में पाया गया कि तीर पेट के भीतर गहराई तक धंसा हुआ था, जिससे कई महत्वपूर्ण आंतरिक अंग प्रभावित हो गए थे। मरीज को पेट में परफोरेशन, आंतरिक रक्तस्राव और गंभीर संक्रमण का खतरा था। डॉक्टरों के अनुसार उपचार में थोड़ी भी देरी मरीज की जान के लिए घातक साबित हो सकती थी।
मरीज के अस्पताल पहुंचते ही जनरल सर्जरी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने उसकी स्थिति का त्वरित आकलन किया और बिना समय गंवाए 2 जुलाई 2026 को आपातकालीन ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने अत्यंत सावधानीपूर्वक तीर को शरीर से बाहर निकाला। इसके बाद क्षतिग्रस्त आंतरिक अंगों और ऊतकों की मरम्मत की गई, रक्तस्राव नियंत्रित किया गया तथा पेट के भीतर जमा रक्त और दूषित द्रव को साफ कर आवश्यक जीवनरक्षक प्रक्रियाएं पूरी की गईं। सफल सर्जरी के बाद मरीज को पोस्ट-ऑपरेटिव आईसीयू में भर्ती किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की निगरानी में उसका उपचार जारी है। अस्पताल के अनुसार मरीज की हालत अब स्थिर है और स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। यदि सुधार इसी तरह जारी रहा तो जल्द ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने बताया कि मरीज बेहद गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचा था, लेकिन सर्जरी विभाग की त्वरित कार्रवाई, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के समन्वित प्रयासों से उसकी जान बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि मेकाहारा में गंभीर ट्रॉमा और आपातकालीन मामलों के इलाज के लिए अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, विशेषज्ञ चिकित्सक और 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध हैं। यह सफल ऑपरेशन जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह के नेतृत्व में डॉ. सुखलाल निराला, डॉ. मनीष साहू, डॉ. रोशन रत्नाकर तथा एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिभा जैन साह, डॉ. जया लालवानी और उनकी टीम ने मिलकर किया। इस सफलता ने एक बार फिर साबित किया कि समय पर उपचार, विशेषज्ञता और बेहतर टीमवर्क से सबसे जटिल ट्रॉमा मामलों में भी मरीजों की जान बचाई जा सकती है।


