10 साल से गोदाम में बंद मनरेगा मजदूरों के टिफिन, 5,860 हितग्राही अब भी इंतजार में

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खैरागढ़। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला खैरागढ़ जनपद पंचायत से सामने आया है। मुख्यमंत्री मनरेगा मजदूर टिफिन वितरण योजना के तहत वर्ष 2016-17 में आए 5,860 टिफिन डिब्बे पिछले करीब 10 वर्षों से सरपंच सदन में रखे हुए हैं, जबकि पात्र हितग्राही आज भी योजना के लाभ का इंतजार कर रहे हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, उस समय मनरेगा में 30 दिन या उससे अधिक रोजगार पाने वाले परिवारों को टिफिन वितरित किए जाने थे। खैरागढ़ जनपद को कुल 15,220 टिफिन मिले थे, जिनमें से 9,360 का वितरण कर दिया गया, लेकिन शेष 5,860 टिफिन अब तक गोदाम में ही पड़े हैं।

बताया गया कि वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण वितरण रोक दिया गया था। इसके बाद मामला प्रशासनिक प्रक्रियाओं और मार्गदर्शन के इंतजार में फाइलों में उलझा रहा। इस बीच प्रदेश में सरकारें बदलीं, लेकिन टिफिन वितरण का कार्य पूरा नहीं हो सका। सरपंच सदन, जो पंचायत प्रतिनिधियों के बैठने और बैठकों के लिए बनाया गया था, वर्षों से टिफिन डिब्बों का गोदाम बना हुआ है। पंचायत प्रतिनिधियों ने हाल ही में मांग की है कि या तो पात्र हितग्राहियों को जल्द टिफिन वितरित किए जाएं या नियमानुसार उनका निस्तारण कर भवन को खाली कराया जाए। जनपद पंचायत खैरागढ़ के सीईओ हिमांशु गुप्ता का कहना है कि यह मामला उनके कार्यकाल से पहले का है। रिकॉर्ड की जांच और संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट की जाएगी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गरीब मजदूरों के लिए खरीदी गई सामग्री आखिर कब तक गोदाम में पड़ी रहेगी और इस लापरवाही की जवाबदेही किसकी तय होगी।