नई दिल्ली। साल 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मानसून एक बड़ी चुनौती बनकर उभर सकता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की रिपोर्ट में कमजोर बारिश और संभावित सूखे को देश के आर्थिक परिदृश्य के लिए सबसे बड़े मैक्रो रिस्क में शामिल किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मानसून का प्रदर्शन कृषि, महंगाई और आर्थिक विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। मौसम से जुड़े अनुमान में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य औसत से नीचे रहने की संभावना जताई गई है। वहीं, अल नीनो के प्रभाव के कारण देश में सूखे जैसी स्थिति बनने का खतरा करीब 60 प्रतिशत तक बताया गया है। कम बारिश का असर खासतौर पर उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों पर पड़ सकता है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई, जलाशयों के जलस्तर और आगे चलकर रबी उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। इसका सीधा असर खाद्य महंगाई पर पड़ने की आशंका है।
हालांकि, दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। NSE के अनुसार, मई 2026 तक देश में रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या 13.1 करोड़ के पार पहुंच गई है। युवाओं और छोटे शहरों के लोगों की भागीदारी बढ़ने से बाजार पहले की तुलना में अधिक डिजिटल और युवा हुआ है। 30 साल से कम उम्र के निवेशकों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है और महिला निवेशकों की भागीदारी में भी सुधार देखा गया है। हालांकि, बड़े निवेशकों का बाजार पर दबदबा अब भी कायम है, क्योंकि कुल कारोबार का बड़ा हिस्सा सीमित संख्या वाले सक्रिय निवेशकों से आता है।
