युद्ध और महंगाई के बीच टाटा मोटर्स सतर्क: खर्च, निवेश और रणनीति पर फिर मंथन

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नई दिल्ली। आज के दौर में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक महंगाई का असर अब भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी दिखाई देने लगा है। देश की प्रमुख वाहन निर्माता टाटा मोटर्स ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अपनी निवेश और खर्च योजनाओं पर सतर्क रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। कंपनी के एमडी और सीईओ गिरीश वॉग ने कहा कि, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। इसका असर कमोडिटी और ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे ऑटो इंडस्ट्री पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।

हालांकि कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए तय लगभग 3,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश (कैपेक्स) लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन खर्च के समय और प्राथमिकताओं में बदलाव संभव माना जा रहा है। कंपनी के अनुसार, डीजल की बढ़ती कीमतें कमर्शियल वाहन बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं, क्योंकि परिचालन लागत का बड़ा हिस्सा ईंधन पर निर्भर करता है। टाटा मोटर्स का कहना है कि, बाजार में वाहनों की मांग अभी बनी हुई है, लेकिन ग्राहक खरीदारी से पहले ज्यादा सोच-विचार कर रहे हैं। कंपनी मानसून, ईंधन कीमतों और वैश्विक बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। इन चुनौतियों के बावजूद कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में घरेलू कमर्शियल वाहन बाजार में सीमित लेकिन सकारात्मक वृद्धि देखने को मिलेगी। वहीं पश्चिम एशिया और दक्षिण एशियाई देशों में चल रहे हालात का असर कंपनी के निर्यात कारोबार पर भी पड़ रहा है।