हैदराबाद। तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों प्रोड्यूसर्स और थिएटर मालिकों (एग्जिबिटर्स) के बीच छिड़ा विवाद अब व्यक्तिगत हमले तक पहुंच गया है। तेलंगाना के सिंगल-स्क्रीन थिएटर्स में रेवेन्यू शेयरिंग के लिए ‘परसेंटेज सिस्टम’ को लेकर शुरू हुई यह बहस अब ‘एशियन सिनेमाज’ के प्रमुख सुनील नारंग और मशहूर प्रोड्यूसर नागा वामसी के बीच आर-पार की लड़ाई में बदल गई है। हाल ही में एक प्रेस मीट के दौरान नागा वामसी ने बिना नाम लिए एक “सेठ जी” पर तंज कसा था, जो हर जगह मल्टीप्लेक्स बना रहे हैं लेकिन सिंगल स्क्रीन बचाने की ‘इमोशनल’ बातें करते हैं। इस पर पलटवार करते हुए सुनील नारंग ने एक टीवी इंटरव्यू में नागा वामसी को ‘डुप्लीकेट बाल वाला’ कहकर संबोधित किया और कहा कि, उन्होंने केवल मल्टीप्लेक्स ही नहीं, बल्कि 33 सिंगल-स्क्रीन थिएटर भी बनवाए हैं। नारंग का यह ‘विग’ वाला कमेंट सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है।

दरअसल, विवाद की जड़ थिएटर्स का रेंटल मॉडल है। एग्जिबिटर्स का तर्क है कि पिछले एक दशक में भारी घाटे और बढ़ते मेंटेनेंस खर्च के कारण सैकड़ों सिंगल स्क्रीन बंद हो चुके हैं, इसलिए उन्हें बचाने के लिए मुनाफे में हिस्सेदारी जरूरी है। दूसरी ओर, नागा वामसी जैसे प्रोड्यूसर्स का कहना है कि, मल्टीप्लेक्स बिजनेस तो फल-फूल रहा है, फिर सिंगल स्क्रीन ही क्यों घाटे में हैं? उन्होंने मांग की है कि, परसेंटेज सिस्टम से पहले एग्जिबिटर्स को थिएटर की सुविधाएं और टिकट ट्रैकिंग बेहतर करनी होगी। इस खींचतान के बीच अल्लू अरविंद, दिल राजू और सुरेश बाबू जैसे दिग्गज फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं, क्योंकि वे प्रोडक्शन और एग्जीबिशन दोनों बिजनेस से जुड़े हैं। ट्रेड एक्सपर्ट्स को डर है कि, यदि यह आपसी कलह जल्द शांत नहीं हुई, तो राम चरण की आगामी फिल्म ‘पेड्डी’ जैसी बड़ी रिलीज के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
