नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में ब्रेंट क्रूड ने 4 साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 126 डॉलर प्रति बैरल का उच्च स्तर छू लिया था, जो 2022 के बाद सबसे बड़ा उछाल माना जा रहा है। हालांकि, 1 मई 2026 को इसमें गिरावट दर्ज की गई और कीमत घटकर 111.81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं WTI क्रूड भी 105.79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।तेल बाजार में यह उतार-चढ़ाव मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक हालात के कारण देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो क्रूड ऑयल की कीमतें 120 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते विवाद और संभावित सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा है। भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन टैक्स स्ट्रक्चर के कारण अलग-अलग शहरों में दाम अलग हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में ईंधन की कीमतें पहले से ही ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि, फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में किसी तरह की बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है, जिससे आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है।
