आंध्रप्रदेश में ईंधन संकट: हैदराबाद के अधिवक्ता ने NHRC का रुख किया, मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

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हैदराबाद। आंध्रप्रदेश में पेट्रोल और डीज़ल की गंभीर कमी और इसके नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर पड़ रहे असर को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के समक्ष एक औपचारिक शिकायत दर्ज की गई है। यह शिकायत 27 अप्रैल 2026 को दायर की गई थी और आयोग ने इसे डायरी संख्या 9268/IN/2026 के तहत स्वीकार कर लिया है। हैदराबाद के अधिवक्ता येन्नम बालाचंदर रेड्डी ने राज्य में उत्पन्न गंभीर ईंधन संकट और प्रशासनिक निष्क्रियता पर चिंता जताई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस कमी के कारण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(d) (आवागमन की स्वतंत्रता) के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।

शिकायत के अनुसार, ईंधन आपूर्ति में बाधा ने राज्य भर में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। विशेष रूप से परिवहन कर्मियों, किसानों, लघु व्यवसायियों और दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों पर इसका व्यापक असर पड़ा है, जिनकी आजीविका आवागमन और ईंधन की उपलब्धता पर निर्भर करती है। याचिका में संवैधानिक न्यायशास्त्र का भी उल्लेख किया गया है और सर्वोच्च न्यायालय के ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के ऐतिहासिक निर्णय का हवाला दिया गया है, जिसमें आजीविका के अधिकार को जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा माना गया था। शिकायत में कहा गया है कि वर्तमान ईंधन संकट आवश्यक संसाधनों तक पहुंच को बाधित कर इस सिद्धांत को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रहा है। शिकायतकर्ता ने NHRC से तत्काल संज्ञान लेने और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक और त्वरित सुधारात्मक कदम उठाने की अनुशंसा की है, ताकि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो सके। इस मामले को NHRC द्वारा शीघ्र विचारार्थ लिए जाने की संभावना है और जनसुविधा पर इसके व्यापक प्रभाव तथा सामाजिक-आर्थिक गंभीरता को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले दिनों में व्यापक ध्यान आकर्षित कर सकता है।