रायपुर। राजधानी के केंद्रीय जेल में 18 से 21 वर्ष आयु वर्ग के विचाराधीन बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गायत्री परिवार रायपुर ने जेल प्रशासन के सहयोग से विशेष ‘नैतिक शिक्षा एवं व्यक्तित्व विकास’ सत्र आयोजित किया। 6 अप्रैल से शुरू हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को अपराध का मार्ग छोड़कर नेक इंसान बनने के लिए प्रेरित करना था। जेल महानिदेशक हिंमाशु गुप्ता और जेल अधीक्षक योगेश सिंह के मार्गदर्शन में कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समता कॉलोनी स्थित गायत्री शक्तिपीठ के परिव्राजक भाई नीलम सिंह सिन्हा ने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के दार्शनिक विचारों के माध्यम से बंदियों को सदाचार, आत्म-साधना और सत्कर्मों की शिक्षा दी। ध्यान योग, व्यक्तित्व विकास, जीवन प्रबंधन और संस्कार निर्माण पर प्रशिक्षण के साथ नियमित योग और ध्यान सत्रों से आत्म नियंत्रण, तनाव प्रबंधन और मानसिक शांति की भावना विकसित की गई। कार्यक्रम का समापन दीप महायज्ञ के साथ हुआ, जिसमें बंदियों ने ‘सत् संकल्प’ का पाठ कर सामूहिक रूप से नेक मार्ग अपनाने का संकल्प लिया। गायत्री परिवार के मीडिया प्रभारी प्रज्ञा प्रकाश निगम ने बताया कि इस तरह के सुधारात्मक कार्यक्रम केवल छत्तीसगढ़ में ही नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों की जेलों में भी आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर गायत्री परिवार और जेल शिक्षक कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। जेल प्रशासन ने कहा कि ऐसे रचनात्मक कार्यक्रमों को लगातार बढ़ावा दिया जाएगा ताकि बंदियों का सर्वांगीण विकास और पुनर्वास सुनिश्चित हो सके।
