डॉ. तीजन बाई केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक आत्मा की सशक्त आवाज हैं
कांकेर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में कार्यरत तुलसी मानस प्रतिष्ठान, जिला कांकेर द्वारा आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह एवं पद्म विभूषण, पद्म भूषण डॉ. तीजन बाई आरुग सम्मान समारोह के पोस्टर का भव्य विमोचन किया गया।जिसमें तुलसी मानस प्रतिष्ठान के प्रदेश संरक्षक, पूर्व सांसद मोहन मंडावी, प्रदेश अध्यक्ष जगदीश देशमुख, प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र ठाकुर, जिलाध्यक्ष के आर गजबल्ला, बस्तर संभाग प्रभारी एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ के जिला संरक्षक लखन नेताम, लोक कलाकार कल्याण संघ के संरक्षक एवं तुलसी मानस प्रतिष्ठान के जिलाउपाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र साहू, का. जिलाध्यक्ष विकास राजू नायक, प्रांतीय मिडिया प्रभारी लोकेश साहू सहित कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों, मानस प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सांस्कृतिक कर्मियों एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही| पोस्टर विमोचन के अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ की गौरवशाली लोकसंस्कृति और पंडवानी परंपरा को विश्व पटल पर स्थापित करने वाली महान लोक कलाकार पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अभिनेता अलीम बंशी ने कहा कि, डॉ. तीजन बाई केवल एक कलाकार नहीं हैं, बल्कि वे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, लोक चेतना और लोक आत्मा की सशक्त आवाज हैं। उन्होंने अपने अद्वितीय गायन, अभिनय और प्रस्तुति शैली के माध्यम से पंडवानी जैसी लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई है। डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, समर्पण और साधना की प्रेरणादायक कहानी है। अत्यंत साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपनी कला साधना को कभी नहीं छोड़ा। उस समय जब महिलाओं का सार्वजनिक मंचों पर लोकगायन करना आसान नहीं माना जाता था, तब उन्होंने सामाजिक चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी प्रतिभा को निखारा।
उन्होंने परंपरागत सीमाओं को तोड़ते हुए पंडवानी की “कापालिक शैली” को अपनाया और अपनी सशक्त प्रस्तुति के बल पर देशभर के कला प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया। डॉ. तीजन बाई ने महाभारत की कथाओं को लोकभाषा, लोकभाव और अभिनय के माध्यम से जिस जीवंतता के साथ प्रस्तुत किया, उसने उन्हें राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई। उनकी प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक स्मृति, जीवन मूल्यों और परंपराओं को संरक्षित रखने का एक सशक्त साधन है।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि, डॉ. तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की पंडवानी कला को विश्व के अनेक देशों तक पहुंचाया। उन्होंने यूरोप, अमेरिका, एशिया और अन्य देशों के विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर अपनी प्रस्तुति देकर भारतीय लोक परंपरा की गरिमा को बढ़ाया। उनकी उपलब्धियों के कारण आज छत्तीसगढ़ की लोककला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। उनकी कला साधना और लोकसंस्कृति के प्रति समर्पण को देखते हुए भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से अलंकृत किया गया है।
इसके अतिरिक्त उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। यह सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी सम्मान है। पोस्टर विमोचन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में जब आधुनिकता के प्रभाव से लोककलाएं और परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होने की स्थिति में पहुंच रही हैं, तब डॉ. तीजन बाई जैसी विभूतियां नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि यदि व्यक्ति में प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और निरंतर साधना का भाव हो, तो वह सीमित संसाधनों के बावजूद विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है। यह आयोजन अलीम बंसी एवं पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई परिवार के सौजन्य से संपन्न होगा।
समारोह का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की लोककला, साहित्य, संस्कृति एवं सामाजिक मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य करने वाले व्यक्तित्वों का सम्मान करना तथा समाज में सांस्कृतिक जागरूकता का प्रसार करना है। तुलसी मानस प्रतिष्ठान के पदाधिकारियों ने बताया कि इस अवसर पर प्रदेशभर के मानस प्रेमी, साहित्यकार, लोक कलाकार, समाजसेवी, शिक्षाविद् एवं विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। कार्यक्रम के माध्यम से समाज में सांस्कृतिक चेतना, भारतीय जीवन मूल्यों और लोक परंपराओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
पोस्टर विमोचन के दौरान उपस्थित अतिथियों ने आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि, ऐसे आयोजन केवल सम्मान समारोह नहीं होते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, परंपरा और विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बनते हैं। अंत में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि “डॉ. तीजन बाई केवल एक लोक कलाकार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना की जीवंत प्रतीक हैं। उनका सम्मान वास्तव में लोककला, लोकसंस्कृति और छत्तीसगढ़ की अस्मिता का सम्मान है। इस अवसर पर यशवंत तिवारी, मन्नू दीवान सहित, अजीत नायक, योजेंद्र वैध, नंदकुमार भास्कर सैकड़ो उपस्थित रहे |
