गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। यहां दो साल पहले स्वीकृत पानी टंकी और पाइपलाइन विस्तार का काम कागजों में पूरा दिख रहा है, लेकिन जमीन पर उसका कोई अस्तित्व नहीं है। हैरानी की बात यह है कि, राशि भी निकाल ली गई, फिर भी निर्माण शुरू तक नहीं हुआ।

आपको बता दें, पूर्व जिला पंचायत सदस्य धनमति यादव इस “गायब” विकास कार्य को लेकर अब थाने पहुंच गईं। उन्होंने देवभोग थाना में लिखित आवेदन देकर गुहार लगाई कि, स्वीकृत कार्य आखिर कहां हुआ, इसकी जांच की जाए। उनके अनुसार, वर्ष 2024 में दासोपारा गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए बोर खनन, पानी टंकी और पाइपलाइन विस्तार के लिए जिला पंचायत निधि से काम मंजूर हुआ था। ग्राम पंचायत चिचिया को कार्य एजेंसी बनाया गया और करीब 1.20 लाख रुपये की पहली किस्त भी निकाल ली गई। लेकिन स्थल पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। पिछले छह महीनों से जनपद और जिला स्तर पर शिकायत करने के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

वहीं, थाना प्रभारी ने बताया कि, मामला प्रारंभिक तौर पर प्रशासनिक प्रकृति का है, लेकिन शिकायत दर्ज कर संबंधित विभाग से जानकारी ली जाएगी। दासोपारा की करीब 600 की आबादी आज भी एक हैंडपंप पर निर्भर है। भीषण गर्मी में जल संकट बढ़ने से ग्रामीणों में नाराजगी है और महिलाओं ने जल्द ही सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है। यह मामला सिस्टम में लापरवाही और संभावित अनियमितता की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
