13 साल बाद मिला न्याय, हाईकोर्ट ने नियुक्ति को किया रद्द

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बिलासपुर। लंबे समय से पदस्थ एक राजस्व उप निरीक्षक की नियुक्ति को उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है। यह मामला वर्ष 2012 में नगर पालिका परिषद भाटापारा द्वारा जारी भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है, जिसमें इस पद के लिए स्नातक और कंप्यूटर डिप्लोमा अनिवार्य योग्यता रखी गई थी। भाटापारा निवासी देवेंद्र कुमार साहू ने तय समय में सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन किया था, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि, उनका नाम न तो पात्र सूची में आया और न ही अपात्र सूची में शामिल किया गया।

इसके बाद वर्ष 2013 में सतीश सिंह चौहान को इस पद पर नियुक्त कर दिया गया। खुद को नजरअंदाज किए जाने से आहत होकर देवेंद्र साहू ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि, उनका आवेदन सही तरीके से प्राप्त हुआ था, फिर भी उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर रखा गया। साथ ही यह भी सामने आया कि, नियुक्त अभ्यर्थी के पिता उस समय नगर पालिका में वरिष्ठ पद पर थे और उनके द्वारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र भी संदेह के घेरे में था।

न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि, किसी पात्र अभ्यर्थी को बिना कारण प्रक्रिया से बाहर करना पूरी चयन प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। अदालत ने यह भी माना कि, चयन प्रक्रिया में पक्षपात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इन्हीं आधारों पर न्यायालय ने नियुक्ति आदेश को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि, पूरी प्रक्रिया दोबारा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाए तथा याचिकाकर्ता के आवेदन पर विधिसम्मत विचार किया जाए।