रायपुर/नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने देश की चुनावी प्रक्रिया को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए अंतर्राष्ट्रीय निर्वाचन आगंतुक कार्यक्रम (IEVP) 2026 का शुभारंभ किया है। यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान (IIIDEM) में आयोजित किया गया, जहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयुक्तों डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ इसका उद्घाटन किया।
इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि, भारत में चुनाव केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र का उत्सव हैं। निर्वाचन आयोग इसे मिशन मोड में संचालित करते हुए पारदर्शिता, निष्पक्षता और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करता है। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों से भारत की विविधता को करीब से देखने और समझने का आह्वान किया।
IEVP-2026 के तहत दुनिया के 23 देशों के 43 प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। इनमें दिल्ली स्थित विभिन्न विदेशी मिशनों के अधिकारी भी शामिल हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत की चुनाव प्रणाली, तकनीकी नवाचारों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने प्रस्तुत करना है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधियों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का विस्तृत प्रदर्शन दिखाया गया। इसके साथ ही ‘मॉक पोल’ के जरिए उन्हें मतदान प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव भी कराया गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने भारत की चुनाव प्रणाली में उपयोग की जाने वाली तकनीक और सुरक्षा उपायों में विशेष रुचि दिखाई।
कार्यक्रम को दो चरणों में आयोजित किया गया है। पहले चरण में 8 और 9 अप्रैल को प्रतिनिधि असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी का दौरा करेंगे। इस दौरान वे चुनाव से जुड़ी जमीनी व्यवस्थाओं का अवलोकन करेंगे, जिसमें मतदान केंद्र, नियंत्रण कक्ष, मीडिया मॉनिटरिंग सिस्टम और लॉजिस्टिक प्रबंधन शामिल हैं। साथ ही वे 9 अप्रैल को वास्तविक मतदान प्रक्रिया को भी करीब से देखेंगे। दूसरे चरण में प्रतिनिधि 20 अप्रैल से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु का दौरा करेंगे। इस दौरान उन्हें विभिन्न राज्यों में चुनाव संचालन के तरीके और स्थानीय स्तर पर अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी।
IEVP कार्यक्रम भारत निर्वाचन आयोग की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य विभिन्न देशों के चुनाव प्रबंधन संस्थानों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से भारत अपनी चुनावी प्रणाली की मजबूती, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करता है।
इस कार्यक्रम से न केवल भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती मिलती है, बल्कि अन्य देशों के साथ ज्ञान और अनुभव साझा करने का भी अवसर मिलता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की यह पहल वैश्विक स्तर पर एक सकारात्मक संदेश देने वाली मानी जा रही है।
