नई दिल्ली। आज – कल लोगों में फैटी लिवर उन हेल्थ प्रॉब्लम में से एक है जो बदलती लाइफस्टाइल और खाने की आदतों की वजह से होती है। फैटी लिवर एक आम हेल्थ प्रॉब्लम है जो लिवर में ज़्यादा फैट जमा होने से होती है। हालांकि शुरुआती स्टेज में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन सूजन, लिवर को नुकसान और गंभीर मामलों में सिरोसिस का खतरा रहता है। इसलिए सही डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करना बहुत ज़रूरी है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एक्सपर्ट्स के अनुसार, खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले तेलों का चुनाव भी फैटी लिवर को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है। खासकर, सोयाबीन, मक्का, कॉटनसीड, ग्रेपसीड और कैनोला जैसे तेलों का ज़्यादा इस्तेमाल लिवर की हेल्थ पर बुरा असर डालता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुछ हेल्दी तेल लिवर के लिए अच्छे होते हैं। एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण लिवर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को भी बेहतर बनाता है। इसका इस्तेमाल सलाद में या कम आंच पर खाना पकाने में किया जा सकता है। एवोकाडो ऑयल भी एक अच्छा ऑप्शन है। यह बाइल फ्लो को बेहतर बनाता है और फैट को पचाने में मदद करता है। यह मीडियम टेम्परेचर पर या सलाद में पकाने के लिए अच्छा है। कोल्ड-प्रेस्ड सरसों के तेल में ओमेगा-3 फैटी एसिड ज़्यादा होता है, जो सूजन कम करता है। यह पाचन को बेहतर बनाने और मेटाबॉलिज़्म बढ़ाने में भी मदद करता है। इसे भारतीय खाने में हल्का तलने या सॉते करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। आपको बता दें की तिल के तेल में एंटीऑक्सीडेंट और लिग्नन होते हैं जो लिवर एंजाइम को रेगुलेट करने में मदद करते हैं। यह मेटाबॉलिज़्म को भी सपोर्ट करता है। अलसी के तेल में प्लांट-बेस्ड ओमेगा-3 फैट लिवर में फैट कम करने में मदद करता है। हालांकि, इसे कच्चा खाना सबसे अच्छा है क्योंकि यह गर्मी के प्रति सेंसिटिव होता है। फैटी लिवर को कंट्रोल करने के लिए सही तेल चुनना एक ज़रूरी कदम है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि इसके साथ ही, बैलेंस्ड डाइट और रेगुलर एक्सरसाइज़ करने से भी लिवर की हेल्थ बेहतर हो सकती है।
Fatty Liver में कौन सा तेल है सबसे बेस्ट? बदलें अपनी कुकिंग, सुधारें अपनी सेहत
