शारदीय नवरात्रि 2026: हिंदू मान्यताओं में मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचनाकार और अपनी दिव्य ऊर्जा से संसार को प्रकाश देने वाली देवी माना जाता है। भक्त उनकी पूजा करके सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करते हैं। धार्मिक विश्वास है कि मां की आराधना से मनोबल बढ़ता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की उपासना की जाती है। वहीं उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के घाटमपुर कस्बे में एक ऐसी जगह है, जो किसी अजूबे से कम नहीं है। इस मंदिर से जुड़ी कुछ ऐसी अनोखी बातें जो सच में हैरान करने वाली हैं।
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इस मंदिर की सबसे चौंकाने वाली बात यहां मौजूद माता की पिंडी है, जिससे बारह महीने पानी रिसता रहता है। यह पानी अंदर से कहां से आ रहा है, यह आज तक एक अनसुलझी पहेली है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि अगर कोई भी व्यक्ति लगातार 6 महीने तक इस बहते हुए जल को अपनी आंखों में लगाए, तो न सिर्फ आंखों से जुड़े बड़े से बड़े रोग ठीक हो जाते हैं, बल्कि खोई हुई रोशनी भी वापस लौट आती है।
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यहां माता की जो पिंडी है, वह पूरी दुनिया में अपने आप में इकलौती मानी जाती है। चतुष्टय यानी चार कोनों वाले आकार की इस पिंडी के दो मुख हैं। यह जमीन पर कुछ इस तरह लेटी हुई अवस्था में दिखाई देती है कि इसका कोई ओर-छोर ही समझ नहीं आता। आमतौर पर मंदिरों में भगवान की सेवा पुजारी, पंडित या साधु-संत करते हैं, लेकिन कुष्मांडा माता मंदिर की यह परंपरा सबसे अलग है। सैकड़ों वर्षो से यहां देवी मां को कपड़े पहनाने, उनका मनमोहक शृंगार करने और भोग लगाने की पूरी जिम्मेदारी मालिन ही निभाती आ रही हैं। मां कूष्मांडा के इस प्रसिद्ध मंदिर में जाने से पहले दर्शन का समय वहां रुकने की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है। नवरात्रि या प्रमुख त्योहारों के दौरान यहां भीड़ काफी बढ़ सकती है।
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