कांग्रेस, शिवजी की बारात नहीं, अराजकता फैलाने वाले हुड़दंगियों की जमात है: शिवराज सिंह चौहान

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नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से कांग्रेस लगातार संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही है। चुनाव में हार मिलती है तो अपनी कमियों को स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग पर आरोप मढ़ देती है। कांग्रेस की राजनीति का यही तरीका बन गया है। जनता नकार दे तो जनादेश पर सवाल उठाओ, चुनाव हार जाओ तो संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करो और अपनी विफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ दो। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की हार का कारण चुनाव आयोग नहीं, बल्कि उसका विचारशून्य नेतृत्व है, जिसे न देश की समझ है, न जनता की नब्ज का पता है और न ही भारत के जीवन मूल्यों, परंपराओं और आस्थाओं की पहचान है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस की हालत लगातार खराब होती जा रही है। असम में चुनावी स्थिति हो, त्रिपुरा के स्थानीय निकाय चुनाव हों, राजस्थान के परिणाम हों या हिमाचल के चुनाव, कांग्रेस लगातार राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही है। चुनाव में हारने के बाद आंदोलन के जरिए अपनी खीझ निकालना उसकी नियति बन गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को समझना चाहिए कि जनता उसे क्यों नकार रही है। ‘नाच न जाने, आंगन टेढ़ा’ की तर्ज पर कांग्रेस अपनी गलतियों को सुधारने के बजाय चुनाव आयोग को दोष दे रही है। पार्टी की अंदरूनी कलह, नेतृत्व का संकट और दिशाहीन राजनीति उसकी सबसे बड़ी समस्या है।

कांग्रेस शिवजी की बारात नहीं, अराजकता फैलाने वालों की जमात है
केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के आंदोलनों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की परंपराओं, आस्थाओं और जीवन मूल्यों से कांग्रेस नेतृत्व का कोई जुड़ाव दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को भगवान शिव के नाम का सहारा लेकर अपने राजनीतिक आचरण को सही ठहराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शिवजी की बारात नहीं है, बल्कि सड़कों पर अराजकता फैलाने की कोशिश करने वाले हुड़दंगियों की जमात बनती जा रही है। लोकतंत्र में आंदोलन करने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल जनता को परेशान करने, जनसुविधाओं को रोकने और अव्यवस्था फैलाने के लिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विरोध की भी मर्यादा होती है और राजनीतिक दलों को उसका पालन करना चाहिए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व दिशाहीन हो चुका है। पार्टी के पास न स्पष्ट नीति है, न ठोस योजना और न ही देश को आगे ले जाने का कोई विश्वसनीय दृष्टिकोण। जब राहुल गांधी स्वयं कहते हैं कि वे कोई योजना नहीं बनाते, तो फिर कांग्रेस से देश की जनता क्या अपेक्षा करे? उन्होंने कहा कि न दिशा, न नीति, न नेतृत्व और न प्लानिंग, यही कांग्रेस की राजनीतिक विफलता का मूल कारण है। बिना योजना और स्पष्ट लक्ष्य के केवल हंगामा करके देश की जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस चाहे जितना हंगामा कर ले, संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर ले और सड़कों पर अराजकता फैलाने का प्रयास कर ले, इससे उसे सफलता नहीं मिलेगी। देश की जनता जागरूक है और वह जानती है कि देश को आगे ले जाने के लिए स्थिर नेतृत्व, स्पष्ट नीति और विकास के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है।

कांग्रेस की अंदरूनी कलह चरम पर, नेतृत्व के झगड़ों से जूझ रही पार्टी
केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति पर निशाना साधते हुए कहा कि आज पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर जगह-जगह संघर्ष चल रहा है। उत्तर प्रदेश में नेताओं के बीच टकराव है, पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष बदलना पड़ा, कर्नाटक में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर खींचतान की स्थिति बनी रहती है और तेलंगाना में भी गुटबाजी के सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी में नेतृत्व को लेकर ही एकराय नहीं है, वह देश को दिशा कैसे दे सकती है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस की समस्या चुनाव आयोग नहीं, उसका नेतृत्व है। जो नेतृत्व अपनी पार्टी को एकजुट नहीं रख पा रहा, वह देश की जनता का विश्वास कैसे जीतेगा? कांग्रेस को अपने भीतर झांकना चाहिए। पार्टी की नीतियों, कार्यशैली और नेतृत्व की विफलताओं पर विचार करना चाहिए। लेकिन कांग्रेस अपनी गलतियों को स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करके जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।

बड़े राज्यों से कांग्रेस का सफाया, दूसरे दलों के सहारे चल रही राजनीति
शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के प्रमुख राज्यों में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है। तमिलनाडु में लगभग 59 वर्षों से, पश्चिम बंगाल में 49 वर्षों से, सिक्किम में 42 वर्षों से, उत्तर प्रदेश में 37 वर्षों से, बिहार में 36 वर्षों से, त्रिपुरा में 33 वर्षों से, गुजरात में 31 वर्षों से, ओडिशा में 26 वर्षों से, नागालैंड में 23 वर्षों से और दिल्ली में 13 वर्षों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है। गोवा में भी पार्टी लंबे समय से सत्ता से दूर है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति ऐसी हो गई है कि कई राज्यों में वह अपने दम पर आगे बढ़ने के बजाय दूसरे दलों के सहारे राजनीति कर रही है। तमिलनाडु में डीएमके, बिहार में आरजेडी, उत्तर प्रदेश में कभी समाजवादी पार्टी तो कभी बहुजन समाज पार्टी, झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा और जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के सहारे कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन तलाशती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कई राज्यों में जूनियर पार्टनर बनकर रह गई है। जो पार्टी कभी देश के बड़े हिस्से में शासन करती थी, आज वह अपने अस्तित्व और राजनीतिक प्रासंगिकता के लिए संघर्ष कर रही है।

90 से अधिक बार चुनी हुई सरकारें हटाईं
केन्द्रीय मंत्री ने कांग्रेस के संवैधानिक मूल्यों के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पार्टी ने अपने शासनकाल में 90 से अधिक बार चुनी हुई सरकारों को हटाने का काम किया, वही आज संविधान की सबसे बड़ी रक्षक बनने का दावा कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में लोकतांत्रिक मूल्यों को सबसे बड़ा आघात आपातकाल के दौरान पहुंचा, जब देश के नागरिकों के अधिकारों को कुचल दिया गया और लोकतंत्र का गला घोंटा गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लोकतंत्र की दुहाई देने से पहले कांग्रेस को अपने इतिहास में झांकना चाहिए। जो पार्टी चुनी हुई सरकारों को हटाने और आपातकाल लगाने का पाप कर चुकी है, उसे संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान पर दूसरों को उपदेश देने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान किसी राजनीतिक दल की सुविधा के अनुसार नहीं चलता। देश संविधान, नियमों और प्रक्रियाओं से चलता है, किसी की सनक या राजनीतिक स्वार्थ से नहीं।

कभी चुनाव आयोग, कभी न्यायपालिका तो कभी सेना पर सवाल
शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के रवैये पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का तरीका अब साफ दिखाई देने लगा है। न्यायालय का फैसला उसके पक्ष में नहीं आता तो न्यायपालिका पर सवाल उठाए जाते हैं, चुनाव में हार मिलती है तो चुनाव आयोग को निशाना बनाया जाता है और जब सेना आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो सेना पर सवाल खड़े किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह कैसी राजनीति है, जिसमें हर उस संस्था पर हमला किया जाता है, जिसका फैसला कांग्रेस की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होता? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध के नाम पर संस्थाओं की विश्वसनीयता को चोट पहुंचाना उचित नहीं है। संवैधानिक संस्थाएं किसी राजनीतिक दल के हितों के लिए नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के संचालन के लिए काम करती हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि संस्थाओं को बदनाम करने से उसकी राजनीतिक जमीन मजबूत नहीं होगी, बल्कि जनता के बीच उसकी विश्वसनीयता और कमजोर होगी।

अराजकता के सहारे सत्ता की चाह
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस जनता का विश्वास जीतने में असफल हो रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी देश की जनता के दिलों पर राज करते हैं। उनके नेतृत्व में विकसित भारत के निर्माण का महायज्ञ चल रहा है और जब प्रधानमंत्री देश से आह्वान करते हैं, तो देशवासी पूरे विश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं। कांग्रेस को यही जनसमर्थन परेशान कर रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता का दिल नहीं जीत पा रही, इसलिए संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करके, झूठ फैलाकर, लोगों को गुमराह करके और सड़कों पर अराजकता पैदा करके सत्ता में वापसी का सपना देख रही है। लेकिन लोकतंत्र में सत्ता का रास्ता जनता के विश्वास से होकर गुजरता है, न कि हंगामे और अव्यवस्था से। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जनता के दिलों से निकालना है तो जनता के बीच जाकर काम करना पड़ेगा, उनका विश्वास जीतना पड़ेगा। केवल दिन-रात मोदी जी का विरोध करने से कांग्रेस को सफलता नहीं मिलने वाली। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश की प्रगति और 140 करोड़ देशवासियों का प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर भरोसा कांग्रेस पचा नहीं पा रही है। वह हर मुद्दे को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विरोध से जोड़ देती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी नीतियों और कार्यशैली पर विचार करना चाहिए। जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ानी चाहिए, न कि राजनीतिक विरोध को अराजकता में बदलना चाहिए।

राहुल गांधी जवाब दें, विदेशी ताकतों के सहारे किस लड़ाई की तैयारी कर रही है कांग्रेस?
शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर विदेशी ताकतों के साथ संबंधों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए कभी वामपंथी दलों, कभी अन्य राजनीतिक समूहों और कभी जॉर्ज सोरोस जैसे नामों से जुड़ी विदेशी ताकतों और संगठनों के समर्थन का सहारा तलाशती दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस देश के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप की मांग करने वाली राजनीति से दूरी बनाने के बजाय ऐसे मुद्दों पर जवाब देने से बचती है। उन्होंने मार्च 2023 में लंदन में भारत के आंतरिक मामलों और लोकतंत्र में विदेशी हस्तक्षेप को लेकर हुई चर्चाओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस से सवाल किया कि आखिर वह किसके सहारे अपनी राजनीति चलाना चाहती है? उन्होंने कहा कि देश के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप की बात करना भारत की लोकतांत्रिक संप्रभुता के प्रति गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी राजनीति का आधार देश की जनता है या विदेशी ताकतों का समर्थन। शिवराज सिंह चौहान ने जनवरी 2025 में कांग्रेस के नए मुख्यालय के उद्घाटन के अवसर पर राहुल गांधी के कथित बयान का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने अपनी लड़ाई केवल भाजपा से नहीं, बल्कि ‘इंडियन स्टेट’ से होने की बात कही थी। राहुल गांधी बताएं कि देश की संवैधानिक व्यवस्था और संस्थाओं के खिलाफ लड़ाई की बात करने का क्या अर्थ है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को अपने बयानों पर देश की जनता के सामने जवाब देना चाहिए। राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन देश की संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता।