नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोने को लेकर रूस और कई देशों की रणनीति अलग-अलग नजर आ रही है। एक तरफ रूस ने 2026 में 22,000 किलोग्राम सोना बेचकर सबको चौंकाया है, वहीं भारत, चीन और पोलैंड जैसे देश लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। इस उलट रुख ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक रूस की सोना बिक्री के पीछे सबसे बड़ा कारण यूक्रेन युद्ध के चलते बढ़ा आर्थिक दबाव है। भारी सैन्य खर्च, बजट घाटा और पश्चिमी प्रतिबंधों से तेल-गैस आय प्रभावित होने के बाद रूस रिजर्व से सोना बेचकर नकदी जुटा रहा है। कमजोर होते रूबल को संभालना भी इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार रूस ने ऊंची कीमतों का फायदा उठाकर घरेलू स्तर पर सोना बेचने की रणनीति अपनाई, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था में रूबल की उपलब्धता बनी रहे। यह कदम संकट के समय वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर भारत, चीन और पोलैंड जैसे देश सोना खरीदकर अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत कर रहे हैं। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर पर निर्भरता घटाने की रणनीति और वैश्विक वित्तीय जोखिमों से बचाव इसके प्रमुख कारण हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि, जहां रूस दबाव में सोना बेच रहा है, वहीं दूसरे देश सुरक्षा कवच के तौर पर सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि, वैश्विक गोल्ड मार्केट में दो अलग आर्थिक रणनीतियां साफ नजर आ रही हैं।
