नई दिल्ली। दिवाली, छठ और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों के दौरान घर जाने वाले यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे समय में नियमित ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे कई रूटों पर फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें भी संचालित करता है। ऐसे में टिकट बुक करते समय यह समझना जरूरी है कि रेगुलर और स्पेशल ट्रेन में आपके लिए कौन सा विकल्प ज्यादा सुविधाजनक और किफायती हो सकता है।
किराया और सफर के समय में अंतर: नियमित ट्रेनों में सामान्य रेलवे किराया लागू होता है, जबकि फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों में स्पेशल फेयर के कारण टिकट की कीमत अधिक हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ स्पेशल ट्रेनों का किराया सामान्य ट्रेन की तुलना में करीब 10 से 30 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है। वहीं संचालन की प्राथमिकता के कारण नियमित ट्रेनों को कई रूटों पर पहले रास्ता दिया जाता है। स्पेशल ट्रेनें जरूरत के मुताबिक रास्ते में रोक दी जा सकती हैं, इसलिए इनमें देरी की संभावना अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है।
कोच और सुविधाओं का भी रखें ध्यान: रेगुलर ट्रेनों में कई आधुनिक एलएचबी कोच के साथ पैंट्री जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं। दूसरी ओर फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों में रेलवे उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग तरह के कोच इस्तेमाल कर सकता है और पैंट्री की सुविधा हर ट्रेन में हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए स्पेशल ट्रेन से यात्रा करने वालों के लिए पर्याप्त खाना और पानी साथ रखना बेहतर विकल्प हो सकता है। अगर आपने यात्रा की योजना पहले से बना रखी है और बजट कम रखना चाहते हैं तो रेगुलर ट्रेन बेहतर विकल्प है। वहीं अचानक यात्रा करनी हो और नियमित ट्रेनों में सीट उपलब्ध न हो तो अतिरिक्त किराया देकर स्पेशल ट्रेन से जाना व्यावहारिक हो सकता है।
यूपी-बिहार रूट के यात्रियों के लिए खास सलाह: दिवाली और छठ के दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वांचल जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे में इन रूटों पर स्पेशल ट्रेनों की घोषणा पर नजर रखना फायदेमंद रहेगा। यात्रियों को सलाह है कि वे आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप पर उपलब्ध ट्रेनों और सीटों की जानकारी नियमित रूप से चेक करते रहें, ताकि नई ट्रेन की बुकिंग शुरू होते ही टिकट कराया जा सके।
