कांग्रेस जिलाध्यक्ष बसंत यादव ने मांगी पूरी जांच और रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
कांकेर। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कथित नक्सली डंप से बरामद 20 लाख रुपये की राशि को लेकर कांकेर में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। टोंडामरका एवं मरकाकुनारी के जंगलों में अभियान के दौरान बरामद बताई जा रही इस राशि को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बसंत यादव ने दो तत्कालीन डीएसपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बसंत यादव का आरोप है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा अभियान के दौरान यदि वास्तव में 20 लाख रुपये नक्सली डंप से बरामद किए गए थे, तो इस पूरी कार्रवाई की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने राशि की बरामदगी से लेकर उसकी जब्ती, मालखाना में जमा किए जाने तथा आगे की कानूनी कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने की मांग की है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि इतनी बड़ी नकद राशि की बरामदगी सामान्य मामला नहीं है।
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ऐसे में बरामदगी की परिस्थितियों, पंचनामा, जब्ती प्रक्रिया, मालखाना रिकॉर्ड तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने दावा किया कि दोनों तत्कालीन डीएसपी पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने मीडिया के समक्ष की है। उनका कहना है कि एसपी स्तर से की गई प्राथमिक जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय तक पहुंचने के करीब दो माह बाद भी दोनों अधिकारियों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। इसे लेकर उन्होंने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने मांग की है बरामद 20 लाख रुपये की राशि से संबंधित सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि राशि किस टीम ने, किस स्थान से और किन परिस्थितियों में बरामद की थी तथा बरामदगी के बाद उसे किस प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा गया।
