- डब्ल्यूआरएस में रावण का पुतला साउथ इंडियन स्टाइल पर होगा
रायपुर। (तुमेश साहू) राजधानी रायपुर में विजयादशमी की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। विजयादशमी के दिन शहर के अलग-अलग इलाके में रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। रायपुर में सबसे ऊंचा 101 फीट का रावण डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में तैयार हो रही है। यहां मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले की ऊंचाई 85-85 फीट होगी। इसी तरह रावणभाठा में रावण का पुतला 60 फीट का होगा। वहीं मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले 55-55 पीट का होगा। पुतले तैयार करने के लिए कारीगर दिन रात जुटे हुए हैं। शहर के प्रमुख समितियों में आतिशबाजी को लेकर खूब होड़ मची हुई है। इस बार शहर में मुबंई, कोलकाता, जबलपुर, और भिलाई से टीमें बुलाई जा रही है । मुख्य रूप से डब्ल्यूआरएस, रावणभाठा मैदान, छत्तीसगढ़ नगर, समता कालोनी, बोरियाखुर्द, बीटीआई ग्राउंड में रावण दहन होगा डब्ल्यूआरएस में इस बार रावण का पुतला साउथ इंडियन स्टाइल पर धोती पहने हुए दिखाई देगा। जो काफी आकर्षक होने वाला है।
50 सालों से अधिक समय से हो रहा आयोजन
नेशनल क्लब सार्वजनिक दशहरा समिति के तत्वाधान में
डब्ल्यूआरएस कॉलोनी रायपुर में भव्य दशहरा उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार 1972 से ही डब्लूआरएस कॉलोनी में दशहरा कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस बार समिति का 55वां आयोजन होगा। प्रदेश में सबसे ज्यादा ऊंचाई की प्रतिमा का दहन यहां होता है। 30 से 40 हजार लोग यहां जुटते हैं। कार्यक्रम में सुरक्षा के लिहाज से सारे बंदोबस्त किए जाते हैं। रेलवे ट्रैक करीब होने की वजह से उसे बैरिकेड किया जा रहा है। फायर सेफ्टी और पुलिस टीमों का भी इंतजाम हैं।
रावणभाठा मैदान में सालों से रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन
सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति के द्वारा रावणभाठा मैदान में हर साल की भांति इस साल भी रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि रावणभाठा मैदान में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के विशाल पुतलों की तैयारी शुरू हो चुकी है। यह कार्यक्रम शहर में होने वाले भव्य आयोजनों में से एक है। रावणभाठा मैदान में 60 फीट के पुतले बनाया जा रहा है। इस आयोजन के लिए मैदान को भी सजाया जा रहा है साथ ही यहां सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाती है, कार्यक्रम सर्वप्रथम रामलीला मंचन के साथ से शुरू की जाएंगी। उसके बाद रावण वध और रावण दहन का कार्यक्रम किया जाएगा। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि दूधाधारी मठ से बालाजी की पालकी को पूजा अर्चना करके निकाली जाती है। पालकी लगभग 200 किलो चांदी का बना होता है जिसमें पंखुड़ी से लेकर सभी वस्तुएं चांदी की होती है। कार्यक्रम समाप्ति के बाद क्षेत्रवासियों के द्वारा बालाजी की पालकी की पूजा की जाती है। रावणभाठा मैदान में पिछले डेढ़ सौ साल से रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस समिति का यह 23 वां साल हैं।
छत्तीसगढ़ के स्थानीय कलाकारों को मिल रहा है मौका : जी. स्वामी
डब्ल्यूआरएस कॉलोनी के नेशनल क्लब के संस्थापक जी. स्वामी ने बताया कि जब तक डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में रावण दहन होगा तब तक नेशनल क्लब रहेगा। रावण के निर्माण की प्रक्रिया नेशनल क्लब द्वारा पूरी की जाती है। उन्होंने बताया कि पहले डब्ल्यू आरएस कॉलोनी के स्थानीय निवासियों के सहयोग से ही रावण का निर्माण किया जाता था। पिछले 35 सालों से रावण दहन सार्वजनिक होने लगा है। इसमें सरकार की भी सहभागिता होने लगी है।
दशकों से रावण दहन की परंपरा चली आ रही: मनोज वर्मा
दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष मनोज वर्मा ने बताया कि रावणभाठा मैदान में दशकों से रावण दहन की परंपरा चली आ रही है। रावणभाठा का यह मैदान दूधाधारी मठ का है। दशकों से हम यहां पर रावण दहन करते आ रहे है। हमसे पहले भी हमारे दादाओं ने यहां रावण दहन किया है। इस बार भी दशहरे का त्यौहार यहां पर धूमधाम से मनाने की तैयारी की जा रही है। बाहरी और स्थानीय कारीगरों को रावण बनाने के लिए यहां बुलाया गया है।
30 साल से रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले का निर्माण कर रहे है
डब्ल्यूआरएस कॉलोनी के मुख्य कारीगर रविराज राम ने बताया कि वह 30 साल से यहां रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले का निर्माण कर रहे है। इस बार यह जिम्मेदारी हमें ही सौंपा गया है। निर्माण कार्य अभी चल रहा है एक सप्ताह के अंतर्गत पुतला बनाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। इस बार रावण का पुतला साउथ इंडियन स्टाइल पर धोती पहने हुए दिखाई देगा। जो काफी आकर्षक होने वाला है। उन्होंने बताया कि वह इसी कॉलोनी में रहता है और यह कार्य मिलना गौरव की बात है।



