इस्लामाबाद। पाकिस्तान के ऑडिटर जनरल की एक विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट में कई संघीय मंत्रालयों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं, प्रक्रिया के उल्लंघन और कमजोर निगरानी का पता चला है। इनमें गृह और नारकोटिक्स कंट्रोल मंत्रालय सबसे अधिक जांच के दायरे में आया है। ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मंत्रालय में ऑडिट के दौरान 65 आपत्तियां दर्ज की गईं, जो समीक्षा किए गए सभी संघीय संस्थानों में सबसे अधिक हैं। इससे प्रशासन और वित्तीय जवाबदेही को लेकर लगातार चिंताएं सामने आई हैं।
डॉन’ के मुताबिक, ऑडिट में सरकारी बकाया राशि की वसूली न होने के कई मामले सामने आए। इनमें बख्तरबंद वाहनों के लिए ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) से जुड़ी रिन्यूअल फीस और जुर्माने के तौर पर 22 मिलियन PKR और निजी सुरक्षा कंपनियों की ओर से बकाया 27 मिलियन PKR शामिल हैं। ऑडिटर्स ने यह भी पाया कि 3,400 से अधिक हथियारों के लाइसेंस से जमा की गई 56 मिलियन PKR की राशि राष्ट्रीय खजाने में जमा नहीं की गई थी। साथ ही, मैनुअल हथियारों के लाइसेंस को डिजिटल रिकॉर्ड में बदलने की प्रक्रिया में ‘प्रोहिबिटेड-बोर’ (प्रतिबंधित श्रेणी के) हथियारों से जुड़ी विसंगतियों पर सवाल उठे। रिपोर्ट में इस्लामाबाद प्रशासन की इस बात के लिए भी आलोचना की गई कि उन्होंने वित्त विभाग की मंजूरी के बिना ड्राइविंग लाइसेंस फीस में बदलाव किया।
इसमें ICT कंसोलिडेटेड फंड के न होने पर भी सवाल उठाए गए और राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना इस्लामाबाद के मुख्य आयुक्त की नियुक्ति पर आपत्ति जताई गई, हालांकि मंत्रालय का कहना था कि नियुक्ति स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार ही की गई थी। ऑडिटर्स ने UNICEF द्वारा वित्तपोषित बाल श्रम सर्वेक्षण (जिस पर 40 मिलियन PKR खर्च हुए थे) पर भी सवाल उठाए, क्योंकि अधिकारी सत्यापन के लिए वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट या खर्च का विवरण उपलब्ध नहीं करा सके। ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, जहां अधिकारियों का कहना था कि पंजाब सांख्यिकी ब्यूरो ने UNICEF के दिशानिर्देशों के तहत फंड का प्रबंधन किया, वहीं ऑडिटर्स का कहना था कि इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया गया।
रिपोर्ट में उन वेंडर्स को 290 मिलियन PKR मूल्य के स्टाम्प पेपर जारी करने का भी जिक्र है जिनके लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। इसके अलावा, भूमि रिकॉर्ड के कंप्यूटराइजेशन, म्यूटेशन फीस, सड़क चालान की वसूली और फ्रंटियर कॉर्प्स, पाकिस्तान रेंजर्स, नेशनल पुलिस फाउंडेशन और ICT पुलिस सहित कई संस्थानों में नियुक्तियों को लेकर भी चिंताएं जताई गईं। ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, ऑडिटर जनरल ने एंटी-नारकोटिक्स फोर्स द्वारा दो हेलीकॉप्टरों के ओवरहाल (मरम्मत और नवीनीकरण) पर बिना किसी खुली प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के 1.2 बिलियन PKR खर्च करने पर भी सवाल उठाए।
