नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े नव उद्यमों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से बातचीत के दौरान कहा कि सरकार का प्रयास ऐसी नीतिगत स्थिरता कायम करना है, जिससे नए क्षेत्रों में जोखिम लेने वाले उद्यमियों और निवेशकों के भीतर भरोसा पैदा हो। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्णयों में निरंतरता जरूरी है, ताकि कोई व्यक्ति जोखिम उठाते समय यह विश्वास रख सके कि कठिन परिस्थिति में सरकार उसका साथ नहीं छोड़ेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद देश में नए अवसर पैदा हुए हैं। इससे न केवल निवेश और नवाचार को बढ़ावा मिला है, बल्कि विदेशों में काम कर रहे भारतीय प्रतिभाओं में भी देश लौटकर काम करने की इच्छा बढ़ी है। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का एक प्रमुख प्रयास यह रहा है कि नीतिगत फैसलों में स्थिरता और निरंतरता बनी रहे। उन्होंने कहा कि यदि कोई उद्यमी किसी नए क्षेत्र में जोखिम लेता है तो उसे यह भरोसा होना चाहिए कि केवल उसकी गलती के कारण मुश्किल आने पर उसका साथ पूरी तरह नहीं छोड़ा जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष जैसे नए क्षेत्र में निजी कंपनियों का प्रवेश इसी विश्वास के वातावरण को मजबूत करने का हिस्सा है। एक अंतरिक्ष नव उद्यम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने प्रधानमंत्री को बताया कि उनकी कंपनी भारत की पहली अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी आधारित एक अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाली नव उद्यम कंपनी बनी है। उन्होंने बताया कि जुलाई में भारत के पहले निजी रॉकेट ने उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया।
कंपनी के प्रतिनिधि ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और अगले वर्ष के मध्य तक प्रति माह एक प्रक्षेपण करने का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी ने इसके लिए तीन कारखाने स्थापित किए हैं और प्रति माह एक रॉकेट तैयार करने की क्षमता विकसित कर ली है। भविष्य में प्रति सप्ताह एक तथा आगे चलकर प्रतिदिन कई प्रक्षेपण करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने अत्याधुनिक रॉकेट इंजन तैयार किया है, जिसकी परीक्षण प्रक्रिया जारी है। प्रधानमंत्री ने जब निवेशकों के विश्वास के बारे में पूछा तो नव उद्यम के प्रतिनिधि ने बताया कि पहले सफल प्रक्षेपण के बाद निवेशकों का भरोसा काफी बढ़ा है। इस पर प्रधानमंत्री ने पूछा कि क्या यह सफलता आगे के काम में मदद कर रही है। प्रतिनिधि ने कहा कि इससे कंपनी को काफी लाभ मिल रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब किसी क्षेत्र में बड़ी सफलता मिलती है तो दुनिया का ध्यान उस क्षेत्र की अन्य भारतीय कंपनियों पर भी जाता है। इससे वैश्विक स्तर पर भारतीय अंतरिक्ष नव उद्यमों के लिए नए अवसर पैदा होते हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े एक उद्यमी ने बताया कि निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खुलने के बाद एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। अमेरिका और यूरोप में काम कर रहे भारतीय नागरिक भी वापस भारत आकर अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए कि दुनिया भर की प्रतिभाओं को लगे कि यदि उन्हें अपने करियर और जीवन में नई ऊंचाइयां हासिल करनी हैं तो भारत आना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के प्रतिभाशाली लोग भारतीय नव उद्यमों और अंतरिक्ष संस्थाओं से जुड़ें, इसके लिए भारत को एक मजबूत आकर्षण केंद्र बनाना होगा।
उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिभाओं को भारत की ओर आकर्षित करना देश की बड़ी ताकत बन सकता है। एक नव उद्यम के प्रतिनिधि ने बताया कि उनकी कंपनी अगले 18 महीनों में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में वैश्विक भू-केंद्र नेटवर्क स्थापित करने की योजना बना रही है। इस नेटवर्क के माध्यम से अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों और उनसे जुड़ी गतिविधियों पर बेहतर निगरानी तथा संपर्क सुविधा विकसित की जा सकेगी।
बातचीत में एक अन्य उद्यमी ने बताया कि उनकी कंपनी ऐसे इंजन तैयार करती है, जिनका इस्तेमाल उपग्रहों को अंतरिक्ष में एक कक्षा से दूसरी कक्षा में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। इन प्रणोदन प्रणालियों का इस्तेमाल उपग्रहों को कई वर्षों तक संचालित करने में किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। भारत सरकार के सहयोग से भारतीय कंपनियों के लिए अपने उत्पादों को विदेशों में निर्यात करने के अवसर भी बढ़े हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लागत के मामले में भारत बेहद प्रतिस्पर्धी है। उन्होंने कहा कि देश की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है और भारतीयों में जोखिम लेने की क्षमता भी मजबूत है। इन खूबियों के कारण भारत अंतरिक्ष उद्योग में तेजी से अपनी जगह बना सकता है। एक नव उद्यम के प्रतिनिधि ने बताया कि उनकी कंपनी ऐसा रोबोटिक अंतरिक्ष यान विकसित कर रही है, जो अंतरिक्ष में जाकर निष्क्रिय उपग्रह को पकड़कर उसकी कक्षा से बाहर निकाल सकेगा।
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यह तकनीक अंतरिक्ष में बढ़ रहे निष्क्रिय और अनुपयोगी उपग्रहों के कारण पैदा होने वाले मलबे को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।एक अन्य कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि उनकी कंपनी अंतरिक्ष यान के युग्मन और पुन: ईंधन भरने की तकनीक पर काम कर रही है। इसका दीर्घकालिक उद्देश्य अंतरिक्ष में ईंधन केंद्र स्थापित करना है।
ऐसी तकनीक भविष्य में लंबे समय तक चलने वाले अंतरिक्ष अभियानों और उपग्रहों के संचालन के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। अंतरिक्ष नाम के एक नव उद्यमी ने प्रधानमंत्री को बताया कि उनकी कंपनी भारत का पहला अंतरिक्ष आधारित औषधि नव उद्यम है। कंपनी ऐसे उपग्रह विकसित कर रही है, जिनके माध्यम से अंतरिक्ष में औषधियों का निर्माण किया जा सके और बाद में उन्हें पृथ्वी पर वापस लाया जा सके।
प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान उनके नाम ‘अंतरिक्ष को लेकर भी सहज अंदाज में सवाल किया। उद्यमी ने बताया कि यह नाम उनकी मां ने रखा था।बातचीत के दौरान एक उद्यमी ने बताया कि एक सफल प्रक्षेपण के बाद केवल एक महीने के भीतर उनकी कंपनी को आठ नए प्रक्षेपण अनुबंध मिले हैं। इनमें अधिकांश अंतरराष्ट्रीय अनुबंध हैं। यह उपलब्धि भारतीय अंतरिक्ष कंपनियों के प्रति वैश्विक ग्राहकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।
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एक नव उद्यमी ने प्रधानमंत्री को बताया कि उनकी कंपनी की नई तकनीक को करीब 10 लाख किसानों तक पहुंचाने की योजना है। इससे अंतरिक्ष आधारित तकनीक का उपयोग कृषि क्षेत्र में भी बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। बातचीत के अंत में एक उद्यमी ने प्रधानमंत्री को स्मृति के तौर पर एक विशेष उपहार दिया। प्रधानमंत्री ने उसे देखकर प्रसन्नता व्यक्त की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोलने से भारत की क्षमता और संभावनाएं दुनिया के सामने अधिक स्पष्ट रूप से आ रही हैं। निजी उपग्रहों और अंतरिक्ष कंपनियों के माध्यम से भारत की वैज्ञानिक, तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को नई पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती निजी भागीदारी, युवा उद्यमियों का उत्साह, वैश्विक बाजार में बढ़ती पहुंच और देश की प्रतिभा मिलकर भारत को अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की नई शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
