नई दिल्ली। भारतीय बैंकिंग प्रणाली को वित्त वर्ष 2026-27 में गैर-निवासी भारतीयों (NRI) की जमा राशि से बड़ा समर्थन मिलने की संभावना है। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एनआरआई और एफसीएनआर-बी (Foreign Currency Non-Resident) जमा में बढ़ोतरी के चलते बैंक डिपॉजिट ग्रोथ 15 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
इससे बैंकों की फंडिंग क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक एफसीएनआर-बी खातों के जरिए 13 से 14 अरब डॉलर जुटाए जा चुके हैं, जिससे बैंकिंग प्रणाली की जमा राशि को मजबूती मिली है। हालांकि, कर्ज (क्रेडिट) की मांग अभी भी जमा वृद्धि से अधिक बनी हुई है। जून के अंत तक बैंक क्रेडिट में 18.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि डिपॉजिट 13.3 प्रतिशत बढ़ा।
एसबीआई रिसर्च का मानना है कि, अब बैंक जमा का विस्तार महानगरों के बजाय अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से हो रहा है। वहीं, शहरी निवेशक म्यूचुअल फंड और इक्विटी जैसे विकल्पों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, मजबूत पूंजी, कम एनपीए और बेहतर बैलेंस शीट के कारण भारतीय बैंकिंग क्षेत्र स्थिर स्थिति में है। विशेषज्ञों का मानना है कि खपत और बुनियादी ढांचा निवेश में तेजी से आने वाले समय में बैंकिंग क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी।
