रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को राजधानी रायपुर के तेलीबांधा चौक का नाम बदलकर सेवा ज्योति संकल्प चौक रखने की घोषणा की है। जिसे लेकर प्रदेश के साहू समाज समेत कई राजनीतिक पार्टियों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। प्रदेश साहू समाज के अध्यक्ष नीरेंद्र साहू, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धनेन्द्र साहू और कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने नाम परिवर्तन का विरोध किया है। साहू समाज अध्यक्ष नीरेंद्र साहू ने कहा है कि तेलीबांधा एक ऐतिहासिक धरोहर है, इसका नाम परिवर्तन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तेलीबांधा सिर्फ एक तालाब या चौक नहीं, बल्कि साहू समाज की 190 साल पुरानी पहचान और धरोहर है। तेलीबांधा का इतिहास साहू समाज से जुड़ा हुआ है। इसका नाम परिवर्तन करना मतलब की समाज की भावनाओं से खेलने जैसा होगा। हम सरकार से मांग करते हैं कि तेलीबांधा तालाब का नाम पहले जैसा ही रखा जाए ताकि आने वाले पीढ़ी को इसके बारे में जानकारी रहे। इस क्षेत्र के विकास और निर्माण कार्यों में तेली/साहू समाज की सक्रिय भागीदारी रही है, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का एक अहम हिस्सा रहा हैं। इसलिए तेली समाज के ऐतिहासिक धरोहर के नाम को परिवर्तन करना उचित नहीं हैं।
वहीं, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धनेन्द्र साहू ने कहा कि तेलीबांधा चौक के नाम बदलने को हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमारे साहू समाज के लोग किसी हालत में नहीं होने देंगे। 100 साल से ज्यादा समय से तेलीबांधा नाम है। उस चौक का नाम तेलीबांधा चौक ही रहेगा। साथ ही प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि ऐतिहासिक और सामाजिक पहचान को मिटाकर राजनीतिक नामकरण करना छत्तीसगढ़ की जनता और साहू समाज की भावनाओं के खिलाफ है। कांग्रेस ने मांग की है कि तेलीबांधा चौक का नाम वही रहने दिया जाए, या फिर भक्त माता कर्मा के नाम पर किया जाए।
– तेलीबांधा तालाब का निर्माण :
जानकारी के अनुसार वर्ष 1835 में, करीब 190 साल पहले पानी की कमी को दूर करने के लिए मालगुजार दीनानाथ साव और उनके पुत्र शोभाराम साव ने करीब 29 एकड़ क्षेत्र में तेलीबांधा तालाब का निर्माण कराया था। यहाँ पहले ‘तेलीबांधा’ नाम से एक छोटा सा गांव बसा हुआ था, इसलिए तालाब और आसपास के क्षेत्र का नाम तेलीबांधा पड़ गया। वर्ष 2016 में नगर निगम और पर्यटन बोर्ड द्वारा इसे मुंबई के ‘मरीन ड्राइव’ की तर्ज पर विकसित किया गया, जो आज रायपुर का सबसे बड़ा हैंगआउट और सेल्फी पॉइंट है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 2018 में यहाँ 82 से 100 मीटर ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज स्थापित किया गया।
तेलीबांधा चौक का नाम परिवर्तन करना, साहू समाज बर्दाश्त नहीं करेगा
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धनेन्द्र साहू ने मुख्यमंत्री की घोषणा को लेकर कहा कि तेलीबांधा चौक के नाम बदलने को हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमारे साहू समाज के लोग किसी हालत में नहीं होने देंगे। 100 साल से ज्यादा समय से तेलीबांधा नाम है। उस चौक का नाम तेलीबांधा चौक ही रहेगा।
तेलीबांधा चौक के नाम में बदलाव समाज की भावनाओं से जुड़ा विषय है
रायपुर। तेलीबांधा चौक को ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के रूप में विकसित किए जाने के प्रस्ताव को लेकर साहू समाज युवा प्रकोष्ठ ने विरोध जताया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत साहू ने कहा कि तेलीबांधा चौक साहू समाज की आस्था, पहचान और गौरव का प्रतीक है। ऐसे में चौक के नाम में बदलाव समाज की भावनाओं से जुड़ा विषय है।
श्री साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा तेलीबांधा चौक को ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के रूप में विकसित करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि साहू समाज विकास कार्यों का विरोधी नहीं है, लेकिन तेलीबांधा चौक की ऐतिहासिक एवं सामाजिक पहचान को बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार यदि ‘सेवा ज्योति चौक’ के नाम से किसी अन्य उपयुक्त चौक को विकसित करना चाहती है, तो साहू समाज को इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने सरकार से तेलीबांधा चौक की मौजूदा पहचान और उससे जुड़ी समाज की भावनाओं का सम्मान करने की मांग की।
तेलीबांधा चौक का नाम वही रहे या भक्त माता कर्मा के नाम पर किया जाये
रायपुर। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि तेलीबांधा चौक का नाम 100 वर्षों से भी अधिक पुराना है। ऐतिहासिक और सामाजिक पहचान को मिटाकर राजनीतिक नामकरण करना छत्तीसगढ़ की जनता और साहू समाज की भावनाओं के खिलाफ है।
सरकार राज्य में कानून- व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और विकास के असली मुद्दों पर काम करने के बजाय केवल स्थानों के नाम बदलकर प्रचार और इवेंट मैनेजमेंट में लगी हुई है। कहा कि सरकार के द्वारा ”सेवा संकल्प अभियान” के तहत रायपुर के प्रसिद्ध तेलीबांधा चौक समेत प्रदेश भर के 38 स्थानों का नाम “सेवा ज्योति संकल्प चौक” के नामकरण और बदलाव के फैसले का कांग्रेस कड़ा विरोध करती है। उन्होंने ने कहा साहू समाज की भावनायें तेलीबांधा तालाब से जुड़ी हुई है। यहां पर नाम भक्त माता कर्मा या तेलिन दाई के नाम से किया जाना चाहिये।तेलीबांधा चौक की ऐतिहासिक पहचान को किसी भी कीमत पर बदलने नहीं दिया जाएगा और यदि इस फैसले को लागू करने की कोशिश की गई, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

