नकटी भूमि विवाद: सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से निर्माण रोकने की मांग की थी

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रायपुर। धरसीवां विकासखंड के ग्राम पंचायत नकटी में खसरा नंबर 460 (रकबा 15.4790 हेक्टेयर) भूमि पर प्रस्तावित निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मामले में रायपुर लोकसभा सांसद एवं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर निर्माण कार्य पर रोक लगाने और यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि ग्राम पंचायत नकटी में प्रस्तावित भूमि पर वर्षों से बसे 80 से अधिक परिवारों को हटाने के लिए नोटिस जारी किया गया है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष है। ग्रामीणों और पंचायत की ओर से इस कार्रवाई का विरोध किया जा रहा है।

सांसद ने अपने पत्र में कहा है कि ग्राम पंचायत और ग्रामसभा की संयुक्त बैठक में यह भूमि परंपरागत रूप से चारागाह के रूप में संरक्षित रही है और इसे गांव के पूर्वजों द्वारा सामुदायिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखा गया था। ग्रामीणों का कहना है कि इसी भूमि पर अब छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा विधायक कॉलोनी निर्माण की योजना बनाई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में पहले से ही कई परिवार निवास कर रहे हैं, जिनमें से कई ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान भी बनाए हैं। इसके अलावा, इस भूमि पर आंगनबाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन सहित कई सरकारी योजनाओं के भवन भी मौजूद हैं।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि यहां निवासरत अधिकतर परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं और मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते हैं। ऐसे में उन्हें विस्थापित करना मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि ग्राम पंचायत नकटी की आपत्ति को ध्यान में रखते हुए खसरा नंबर 460 की भूमि पर प्रस्तावित विधायक कॉलोनी निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए और पहले से बसे गरीब परिवारों के हितों को सुरक्षित रखा जाए।

ग्रामीणों की मांग है कि यदि कॉलोनी का निर्माण आवश्यक है तो उसे वैकल्पिक भूमि पर किया जाए या फिर विवादित हिस्से को छोड़कर शेष भूमि पर ही निर्माण कार्य किया जाए। इस पूरे मामले को लेकर गांव में तनाव और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीण प्रशासन से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि किसी भी परिवार को बेघर न होना पड़े। प्रशासनिक स्तर पर इस विषय पर अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन पत्र के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा में आ गया है। यह मामला भूमि उपयोग, ग्रामीण अधिकार और विकास योजनाओं के बीच संतुलन से जुड़ा हुआ है, जिस पर सभी पक्षों की सहमति से ही समाधान निकल सकता है।