सोसायटी के मर्दों ने घर में घुसकर महिला के साथ की छेड़खानी, वीडियो देखे

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रायपुर। राजधानी रायपुर में एक महिला द्वारा पुलिस आयुक्त कार्यालय में की गई शिकायत के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शिकायत में मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना, अभद्र व्यवहार, महिला की गरिमा भंग करने के प्रयास, अश्लील गाली-गलौज, राजनीतिक दबाव, झूठे आपराधिक प्रकरण में फंसाने की कथित साजिश तथा पुलिस कार्रवाई को प्रभावित किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस उपायुक्त (DCP) स्तर से कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद थाना स्तर पर उनका पालन नहीं किया गया, जिससे निष्पक्ष विवेचना पर प्रश्नचिह्न लग गया है। शिकायत के अनुसार, पुलिस आयुक्त कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत करने के बाद पुलिस उपायुक्त अमित तुकाराम कामले ने उपलब्ध वीडियो और शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विधिसम्मत कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। पीड़िता का आरोप है कि इसके बावजूद न्यू राजेंद्र नगर थाना स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और मामले की जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि इससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद को झटका लगा है।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि जब उनका बयान न्यू राजेंद्र नगर थाने में दर्ज किया जा रहा था, तब कथन कक्ष में मौजूद एएसआई चंदेल लगातार उनके बयान में हस्तक्षेप करते रहे। शिकायत के मुताबिक उन्हें बार-बार यह समझाने का प्रयास किया गया कि घटना को अधिक गंभीर रूप में दर्ज कराने की आवश्यकता नहीं है। कथित तौर पर उन्हें यह भी कहा गया कि यदि मामला छोटी धाराओं में दर्ज होगा तो आरोपी को थाने से ही जमानत मिल जाएगी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस तरह के व्यवहार के कारण वे अपने साथ हुई पूरी घटना को स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से दर्ज नहीं करा सकीं।

शिकायत में बताया गया है कि पूरा विवाद सोसायटी की निजी पार्किंग में पालतू कुत्ते द्वारा बार-बार गंदगी किए जाने के विरोध से शुरू हुआ था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि विरोध करने के बाद एक महिला, जो स्वयं को अधिवक्ता बताती है, के साथ प्रतीक सिंह, विवेक शर्मा और अन्य लोग उनके घर पहुंचे। शिकायत के अनुसार उस समय प्रतीक सिंह और विवेक शर्मा शराब के नशे में थे और उन्होंने जूते उतारकर मारपीट करने का प्रयास किया। पीड़ित पक्ष का दावा है कि यह पूरा घटनाक्रम सोसायटी परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुआ है।

महिला ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान प्रतीक सिंह ने उनके वक्षस्थल और कमर पर बलपूर्वक प्रहार किया, जिससे उन्हें शारीरिक चोट पहुंची और पूरा परिवार भयभीत हो गया। शिकायत के अनुसार स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि परिवार की बुजुर्ग महिला को आरोपितों के सामने पैरों पर गिरकर माफी मांगनी पड़ी, लेकिन इसके बावजूद विवाद समाप्त नहीं हुआ और कथित रूप से आरोपितों का आक्रामक व्यवहार जारी रहा। पीड़ित पक्ष ने आगे आरोप लगाया है कि घटना के बाद सभी लोग न्यू राजेंद्र नगर थाना पहुंचे। वहां थाना प्रभारी के कक्ष के ठीक बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे के नीचे कथित रूप से भय और दबाव का माहौल बनाकर उनसे माफीनामा लिखवाया गया। शिकायत में कहा गया है कि स्वयं को अधिवक्ता बताने वाली महिला लगातार यह निर्देश देती रही कि माफीनामे में क्या लिखा जाए और किस प्रकार लिखा जाए। पीड़िता का आरोप है कि माफीनामा लिखे जाने के बाद उसे विवेक शर्मा ने अपने कब्जे में ले लिया।

शिकायत में रचित कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने कथित रूप से धमकी दी कि वे “20 महिलाओं को गवाह के रूप में खड़ा कर देंगे” और पूरे परिवार को झूठे आपराधिक मामले में जेल भिजवा देंगे। शिकायत के अनुसार यह सब थाना परिसर में हुआ, लेकिन वहां मौजूद किसी पुलिस अधिकारी ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया। इसी कारण पीड़ित परिवार का पुलिस व्यवस्था से विश्वास उठने लगा। पीड़ित परिवार का कहना है कि इन घटनाओं के बाद वे इतने भयभीत हो गए कि सुरक्षा कारणों से रायपुर स्थित अपना घर

प्रशासन ने जारी किए वैकल्पिक रूटमैप छोड़कर भिलाई में रहने के लिए मजबूर हो गए। उनका आरोप है कि उन्हें कई बार थाने बुलाया गया, लेकिन दूसरी ओर आरोपित पक्ष कथित रूप से उपस्थित नहीं हुआ। इससे उन्हें बार-बार मानसिक, आर्थिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। महिला ने अपनी शिकायत में पूरे घटनाक्रम से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की है। इसमें सोसायटी परिसर के सीसीटीवी फुटेज, थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज, व्हाट्सएप संदेश, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं। उनका कहना है कि इन साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस मामले ने कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

यदि वरिष्ठ अधिकारी स्तर से कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, तो थाना स्तर पर उनका पालन क्यों नहीं हुआ? क्या शिकायतकर्ता का बयान पूरी स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ दर्ज किया गया? क्या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया समय पर अपनाई गई? क्या विवेचना पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है? इन सभी सवालों के जवाब अब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे। फिलहाल यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोप पीड़ित पक्ष के दावे और आरोप हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी।

पुलिस की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने का इंतजार है। यदि जांच में शिकायत के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई निष्पक्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।