पेवर ब्लॉक घोटाले में बड़ा एक्शन, भिलाई के 9 अधिकारियों को नोटिस

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दुर्ग। भिलाई नगर निगम में 12.66 करोड़ रुपये के पेवर ब्लॉक निर्माण घोटाले की जांच का दायरा लगातार विस्तृत होता जा रहा है। उप अभियंताओं और ठेकेदारों को नोटिस भेजने के बाद नगर निगम प्रशासन ने नौ वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनका अभिमत मांगा है। इनमें पांच कार्यपालन अभियंता कुलदीप गुप्ता, बीके वर्मा, रवि सिन्हा, अखिलेश चंद्राकर, संजय बागड़े तथा चार सहायक अभियंता अरविंद शर्मा, वसीम खान, आलोक पसीना और आरएस राजपूत शामिल हैं। अफसरों और ठेकेदारों का पक्ष सामने आने के बाद ही गड़बड़ी की वास्तविक सीमा और जिम्मेदारी तय हो सकेगी। शिकायतकर्ता का दावा है कि घोटाले की कुल रकम और बढ़ सकती है, जिसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगी।

वरिष्ठ अधिकारियों से मांगा गया जवाब:
नोटिस मिलने के बाद ठेकेदारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम आयुक्त से मुलाकात की और नोटिस जारी करने का कारण पूछा। निगम आयुक्त ने ठेकेदारों को चल रही पूरी जांच प्रक्रिया की जानकारी प्रदान की। दूसरी ओर, नोटिस के बाद कुछ उप अभियंताओं ने ठेकेदारों के बिल तैयार करने और निर्माण कार्यों के मापन से दूरी बना ली है। उप अभियंताओं को आशंका है कि यदि भविष्य में किसी कार्य में कमी पाई गई तो उन पर जिम्मेदारी आ सकती है। इसके विपरीत, ठेकेदारों ने चिंता जताई है कि मापन और बिलिंग प्रक्रिया बाधित होने से आगामी त्योहारों से पहले उनका बकाया भुगतान अटक जाएगा।

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फाइलों की जांच और ठेकेदारों पर असर:
नगर निगम में पेवर ब्लॉक से संबंधित कुल 33 फाइलों की जांच की प्रक्रिया जारी है। जांच टीम ने अब तक 29 फाइलों का परीक्षण पूर्ण कर लिया है। इसके अलावा तीन अन्य फाइलें प्राप्त होने के बाद उनका परीक्षण लोक निर्माण विभाग से कराने की योजना है। इसके साथ ही वर्ष 2023 में निर्माण कार्य करने वाले 19 ठेकेदारों को भी नोटिस भेजकर उनका जवाब मांगा गया है। अधिकारियों और ठेकेदारों से स्पष्टीकरण प्राप्त होने के बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो पाएगी।

सांसद की शिकायत पर शुरू हुई जांच:
पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में अनियमितता को लेकर भारतीय जनता पार्टी के पार्षद संतोष मौर्य ने सांसद विजय बघेल से शिकायत दर्ज कराई थी। सांसद ने मामले की गहराई से जांच कराने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा था। कलेक्टर ने निर्देश जारी कर लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंताओं को शामिल करते हुए एक विशेष जांच टीम गठित की। जांच टीम द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने निगम आयुक्त को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद ही यह विस्तृत पड़ताल शुरू हुई है।

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