340 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, पुलिस ने डॉक्टर मनीष गुप्ता पर घरेलू सहायिका की हत्या का लगाया आरोप; 43 गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य शामिल
नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के कैलाश हिल्स में घरेलू सहायिका मीना हलदर की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने साकेत कोर्ट में 340 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस ने 50 वर्षीय डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर मनीष गुप्ता पर 45 वर्षीय घरेलू सहायिका की कथित हत्या का आरोप लगाया है। अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेने के लिए 18 सितंबर की तारीख तय की है।पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, डॉक्टर गुप्ता पिछले कुछ समय से मीना हलदर के काम से नाराज थे। पुलिस का आरोप है कि डॉक्टर चाहते थे कि घरेलू सहायिका उनके निर्देशों के अनुसार क्लिनिक की सफाई करे, जबकि वह उनकी पत्नी के निर्देशों को अधिक महत्व देती थी। इसी बात को लेकर डॉक्टर कथित तौर पर नाराज रहते थे।पुलिस ने इस संबंध में मीना हलदर के बेटे का बयान भी दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, बेटे ने बताया कि उसकी मां ने डॉक्टर के बार-बार डांटने और उसके काम से नाराज रहने की शिकायत की थी।
क्लिनिक की सफाई को लेकर शुरू हुआ विवाद
चार्जशीट के अनुसार, मीना हलदर करीब 16 वर्षों से डॉक्टर मनीष गुप्ता के परिवार के यहां घरेलू सहायिका के तौर पर काम कर रही थीं। 18 जून की सुबह करीब 10:30 बजे वह रोज की तरह काम के लिए डॉक्टर के घर पहुंचीं।पुलिस के मुताबिक, डॉक्टर की पत्नी करीब 10 बजे करोल बाग स्थित अपने आयुर्वेदिक क्लिनिक के लिए निकल गई थीं, जबकि उनका 18 वर्षीय बेटा कमरे में सो रहा था। डॉक्टर ने कथित तौर पर मीना से अपने फ्लैट से सटे डर्मेटोलॉजी क्लिनिक की सफाई करने को कहा था, क्योंकि सुबह 11 बजे मरीजों के आने की उम्मीद थी।पुलिस का आरोप है कि जब डॉक्टर क्लिनिक पहुंचे तो उन्हें वह गंदा मिला और उन्होंने मीना को डांटा। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर मीना से छत पर बने स्टोररूम की सफाई करने के लिए कहा।चार्जशीट के मुताबिक, स्टोररूम में जाने के बाद डॉक्टर ने कथित तौर पर मीना पर हमला किया। पुलिस का आरोप है कि मीना वहां से निकलकर छत पर पहुंचीं, जिसके बाद डॉक्टर ने उनका पीछा किया और चाकू से हमला किया।
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पड़ोसी ने पुलिस को दी थी सूचना
पुलिस के मुताबिक, सुबह करीब 11:40 बजे एक पड़ोसी ने मीना हलदर को छत पर गंभीर रूप से घायल अवस्था में देखा और पीसीआर को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने डॉक्टर मनीष गुप्ता को उनके अपार्टमेंट से गिरफ्तार कर लिया था।पुलिस ने मामले में डॉक्टर के कपड़ों से मिले खून को भी अहम साक्ष्य बताया है। चार्जशीट के अनुसार, कपड़ों से मिले खून का मिलान मीना हलदर के खून से हुआ है।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पुलिस की जांच
चार्जशीट में डॉक्टर और उनके परिवार की ओर से बताए गए मानसिक स्वास्थ्य संबंधी पहलू का भी उल्लेख किया गया है। परिवार ने कथित तौर पर पुलिस को बताया था कि डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का इलाज करा रहे थे और कई वर्षों से एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं ले रहे थे।पुलिस के मुताबिक, डॉक्टर की मानसिक जांच कराई गई और पुराने मेडिकल रिकॉर्ड व दवाओं की पर्चियों की भी जांच की गई। पुलिस का कहना है कि हाल के समय में उनके व्यवहार में किसी बदलाव का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। जांच के दौरान डॉक्टर ने कथित तौर पर अपने बेटे की पढ़ाई को लेकर चिंता की बात कही थी, लेकिन पुलिस के अनुसार इस चिंता को हत्या से जोड़ने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला।
चार्जशीट में 43 गवाह, बचाव पक्ष ने उठाए सवाल
पुलिस ने चार्जशीट में कुल 43 गवाहों के नाम शामिल किए हैं। मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। पुलिस के मुताबिक, एक पड़ोसी अहम गवाह है, जिसने कथित तौर पर घटना को देखा था।वहीं, डॉक्टर मनीष गुप्ता के वकील एडवोकेट कमल नयन तिवारी ने पुलिस की जांच और उसकी थ्योरी पर सवाल उठाए हैं। बचाव पक्ष का कहना है कि पुलिस ने जांच के दौरान अलग-अलग दावे किए हैं और अब घरेलू सहायिका को लेकर डॉक्टर और उनकी पत्नी के बीच विवाद की थ्योरी सामने रखी गई है।वकील ने यह भी दावा किया कि जिस छत पर मीना हलदर का शव मिला, वहां आने-जाने के कई रास्ते हैं। बचाव पक्ष के मुताबिक, किसी प्रत्यक्षदर्शी ने यह नहीं कहा कि डॉक्टर गुप्ता ने ही हत्या की थी।डॉक्टर मनीष गुप्ता फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। मामले में अदालत अब दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर विचार करेगी।
