जितिया व्रत 2026: हिंदू धर्म में जितिया व्रत, जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है, माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस व्रत को संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना से किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान जीमूतवाहन की पूजा और व्रत के बाद बच्चों को कुछ शुभ वस्तुएं या प्रसाद देना मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है कि इससे संतान पर भगवान जीमूतवाहन की कृपा बनी रहती है। इस साल जितिया व्रत 3 अक्तूबर 2026 को मनाया जाएगा। व्रत और पूजा पूरी होने के बाद माताएं अपनी संतान को प्रेमपूर्वक कुछ विशेष चीजें दे सकती हैं। आइए जानते हैं जितिया के अवसर पर बच्चों को कौन-कौन सी 5 चीजें देना शुभ माना जाता है।
जितिया का पवित्र धागा:
जितिया व्रत में पवित्र धागे की परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के बाद माता भगवान जीमूतवाहन का स्मरण करते हुए लाल या पीले सूती धागे को बच्चे की कलाई या गले में बांध सकती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह धागा संतान की रक्षा और मंगल की कामना का प्रतीक माना जाता है। इसे बांधते समय माता अपने बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए प्रार्थना कर सकती हैं।
नए कपड़े:
जितिया के दिन बच्चों को नए वस्त्र देना भी शुभ माना जाता है। नए कपड़े नई शुरुआत, प्रसन्नता और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। पूजा संपन्न होने के बाद बच्चे को नए कपड़े पहनाकर घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद दिलाया जा सकता है। इससे त्योहार की खुशी भी बढ़ती है और परिवार में सकारात्मक माहौल बना रहता है।
मौसमी फल और खीरा:
जितिया की परंपराओं में खीरे का भी विशेष उल्लेख मिलता है। इसे संतान और वंश की खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। पूजा के बाद खीरे और मौसमी फलों को प्रसाद के रूप में बच्चों को दिया जा सकता है। मान्यता के अनुसार ऐसा करने से संतान के सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना पूरी करने का भाव जुड़ा होता है।
खिलौने:
अगर बच्चे छोटे हैं तो जितिया के अवसर पर उन्हें उनकी पसंद का खिलौना देना भी खुशी का माध्यम बन सकता है। धार्मिक मान्यताओं में बच्चों की प्रसन्नता और परिवार की खुशहाली को भी शुभ माना जाता है। पूजा के बाद बच्चे को खिलौना देकर उसके सुखी और आनंदमय जीवन की कामना की जा सकती है। इससे बच्चे के लिए त्योहार का दिन और भी यादगार बन जाता है।
ठेकुआ या चने का प्रसाद:
जितिया व्रत से जुड़े प्रसाद में ठेकुआ और चने का भी महत्व माना जाता है। पूजा पूरी होने के बाद इसे बच्चों को प्रसाद के रूप में दिया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है और इसे भगवान के प्रति श्रद्धा का प्रतीक समझा जाता है। माता बच्चे को प्रसाद देते समय उसके अच्छे स्वास्थ्य, ऊर्जा और सुखी जीवन के लिए प्रार्थना कर सकती हैं।





